बंगाल में महा संग्राम का ऐलान
प. बंगाल में लोकसभा चुनाव के महासंग्राम का ऐलान हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने
माकपा, कांग्रेस और भाजपा पर पश्चिम बंगाल में मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा तीनों
गठबंधन बनाकर हमारे खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने साफतौर पर कह दिया बंगाल में
भाजपा के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस लड़ेगी, क्योंकि वही भाजपा को सबक सीखा सकती है। ममता
बनर्जी के बयान से गठबंधन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक समीक्षकों का कहना
है ममता दो तीन सीटें कांग्रेस को देने को तैयार है मगर माकपा से समझोते के मूढ़ में नहीं है।
माकपा भी ममता से दो दो हाथ करने को तैयार है। वहीं भाजपा की चुनावी कमान गृह मंत्री
अमित शाह ने संभाल ली है। भाजपा ने बंगाल में इस बार 35 सीट जीतने का लक्ष्य रखा है।
इस लिहाज से इस पर काम भी शुरू हो गया है। भाजपा ने जीत के लिए रणनीति बनानी शुरू
कर दी है। प. बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें है। इनमें से पिछले लोकसभा चुनाव में तृणमूल
कांग्रेस ने 22, भजपा ने 18 और कांग्रेस ने 2 सीटें हासिल की थी।
प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सियासत तीन लोकों से न्यारी है। बंगाल में
कम्युनिष्टों के साथ अपनी मातृ संस्था कांग्रेस को जड़ से उखाड़ने का श्रेय ममता को दिया जा
सकता है। ममता बनर्जी अपने लड़ाकू अंदाज़ के लिए देशभर में जानी जाती है। उन्होंने मोदी के
खिलाफ इंडिया गठबंधन में कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे का नाम पीएम फेस के लिए
प्रस्तावित कर एक तीर से कई शिकार करने का प्रयास किया है। असल में उनकी वामपंथियों के
साथ कांग्रेस और भाजपा तीनों से ही सियासी पटरी नहीं बैठती। हालाँकि वे कांग्रेस की ही उपज
है। एक बार भाजपा के साथ भी उन्होंने सरकार बनाई थी। आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधान
मंत्री नरेंद्र मोदी को पटकनी देने के लिए ममता बनर्जी विपक्षी गठबंधन इंडिया के साथ हो गई
है। इंडिया में ममता के साथ उनके धुर विरोधी वामपंथी और कांग्रेसी भी शामिल है। बंगाल में
इस समय ममता की तूती बोल रही है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी गाहे
बगाहे ममता की आलोचना करने से नहीं चूकते। ऐसी स्थिति में बंगाल में सीटों की शेयरिंग को
लेकर बड़ी माथा पच्ची होंगी।
ममता लगातार मोदी पर हमला करने वाली नेत्री के रूप में प्रसिद्ध है। ममता ने प्रधान मंत्री
मोदी की सबसे बड़ी आलोचक के रूप में अपनी छवि बनाई है। वे लगभग हर मामले में मोदी
की आलोचना से नहीं चूकती। गौरतलब है बंगाल की कुल 42 लोकसभा सीटों में से 18 पर
भाजपा का कब्ज़ा है। अगले चुनाव में भाजपा इन सीटों में बढ़ोतरी का प्रयास कर रही है वहीं
ममता की पार्टी भाजपा से इन सीटों को छीनने के लिए हर संभव प्रयास में जुटी है। उन्होंने
लोकसभा चुनाव में विरोधी दलों के गठबंधन को लेकर साफ कर दिया है कि जो पार्टी जिस
राज्य में मजबूत है, वहां वह भाजपा के खिलाफ लड़ाई लड़े। उन्होंने कहा कि बंगाल में तृणमूल
कांग्रेस, दिल्ली पंजाब में आप, बिहार में नीतीश, तेजस्वी और कांग्रेस उसी तरह से झारखंड में
भी, जो क्षेत्रीय पार्टी मजबूत है, वहां भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़े। उन्होंने कहा कि बिहार,
ओडिशा, तमिलनाडु, झारखंड में मजबूत पार्टी को प्राथमिकता मिले। एक पार्टी दूसरी पार्टी को
समर्थन दें तभी सही मायने में विपक्ष का एका स्थापित हो सकता है।
प. बंगाल में 34 साल तक एक छत्र शासन करने वाले कम्युनिष्टों को सत्ताच्युत कर ममता की टीएमसी
2011 से पश्चिम बंगाल में सत्ता में है। इससे पूर्व 1977 से 2011 तक पहले दिग्गज नेता ज्योति बसु और
फिर बुद्धदेब भट्टाचार्य ने राज सत्ता की कमान संभाली थी। 2011 के चुनाव में ममता ने कम्युनिष्टों का
शासन ऐसा उखाड़ा की आज उनका नाम लेवा भी वहां नहीं बचा है। 25 साल बाद भी बंगाल पर ममता का
जलवा बरकरार है और वे विधिवत निर्वाचित मुख्यमंत्री हैं। पार्टी हाई कमान भी वे स्वयं हैं और अपने सभी
प्रकार के निर्णय खुद ही लेती हैं। इसमें किसी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करतीं।
गौरतलब है बंगाल रक्तरंजित चुनावों के लिए कुख्यात है। इस वर्ष जुलाई में हुए पंचायत चुनाव की शुरुआत
से लेकर खत्म होने के बाद तक कम से कम 50 से अधिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या हुई। चुनावी
हिंसा में सैंकड़ों लोग घायल हुए। भाजपा ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर हिंसा फैलाने का आरोप लगाया।
कांग्रेस और माकपा ने भी भाजपा के सुर में सुर मिलाकर तृणमूल पर आरोप लगाए ।
- बाल मुकुन्द ओझा