भारत में लोकतंत्र मजबूत, अरुण चतुर्वेदी ने विपक्ष को घेरा
जयपुर। भारत में लोकतंत्र की मजबूती और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। इसी बीच भाजपा नेता अरुण चतुर्वेदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं और जनता अपने मताधिकार के जरिए किसी भी सरकार को सत्ता से बाहर कर सकती है। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का भी बचाव किया।
आईएएनएस से बातचीत में चतुर्वेदी ने 'रिजीम चेंज' यानी सत्ता परिवर्तन से जुड़े विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां जनता को वोट के जरिए सरकार चुनने और बदलने का अधिकार है।
1977 का उदाहरण देकर विपक्ष को दिया जवाब
अरुण चतुर्वेदी ने अपने तर्क के समर्थन में वर्ष 1977 के लोकसभा चुनावों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय जनता ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चुनाव में सत्ता से बाहर कर दिया था, जबकि उन्हें बेहद ताकतवर नेता माना जाता था।
भाजपा नेता के मुताबिक, यह उदाहरण बताता है कि भारत में सत्ता परिवर्तन के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत है। जनता चुनाव के माध्यम से अपना फैसला सुनाती है और किसी भी सरकार का भविष्य मतदाताओं के हाथ में होता है।
राहुल गांधी और विपक्ष पर भी साधा निशाना
चतुर्वेदी ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ-साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे विपक्षी समूहों के आरोपों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश का आम नागरिक संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास रखता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जनता के समर्थन का दावा करते हुए कहा कि दिल्ली में कुछ हजार लोगों के एकत्र होने से पूरे देश की राय तय नहीं हो जाती। उनके मुताबिक, देश को अस्थिर करने की कोशिशों को जनता का व्यापक समर्थन नहीं माना जा सकता।
कानून के शासन पर क्या बोले भाजपा नेता?
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भाजपा नेता ने कहा कि देश में कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए और कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से नियमों की अनदेखी नहीं कर सकता।
उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करती है। उनके अनुसार, कानून लागू करने की प्रक्रिया किसी राजनीतिक दल की इच्छा या राजनीतिक मंशा के आधार पर नहीं चलनी चाहिए।
चतुर्वेदी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के नेतृत्व में कानून का शासन लागू होने की बात भी कही।
एसआईआर पर कांग्रेस को लेकर किया दावा
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब में चतुर्वेदी ने कहा कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में भी यह प्रक्रिया सात बार कराई जा चुकी है।
भाजपा नेता की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। एसआईआर को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बहस जारी है।
चतुर्वेदी ने अपने बयान में लोकतांत्रिक व्यवस्था, कानून के शासन और चुनावी प्रक्रिया का बचाव किया। वहीं, मतदाता सूची से जुड़े आरोपों पर विपक्ष की आपत्तियां राजनीतिक चर्चा का प्रमुख मुद्दा बनी हुई हैं।