डेंगू हुआ विकराल
- बाल मुकुन्द ओझा
दुनिया ने कोरोना पर काबू पा लिया मगर डेंगू जैसी बीमारी आज भी लोगों को डस रही है। हर
साल हजारों लोग डेंगू से मौत के मुंह में समा जाते है। आमतौर पर बारिश का मौसम खत्म
होने के साथ डेंगू के मामलों में वृद्धि देखी जाती है। मगर देश के कुछ राज्यों में अभी भी
बारिश हो रही है और तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। पानी जमा होने, कूलर
आदि की सफाई नहीं होने या घर के आसपास गंदा पानी एकत्रित होने से मच्छर पनपते हैं,
जिससे मच्छरजनित बीमारियों का जोखिम बना रहता है। जलवायु परिवर्तन के कारण देश और
दुनिया में डेंगू और चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित वायरल बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
जलवायु परिवर्तन का असर भारत के साथ दुनियाभर में देखा जा रहा है। जहां-जहां अभी बारिश
हुई है, वहां डेंगू और अन्य तरह की बीमारियों का फैलना स्वाभाविक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन
के अनुसार, हाल के दशकों में दुनिया भर में डेंगू के मामलों में अप्रत्यासित रूप से वृद्धि हुई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठनके मुताबिक दुनिया की आधी आबादी को डेंगू का खतरा है यानि लगभग
4 अरब लोग उन जगहों पर रहते हैं, जहां डेंगू बुखार आसानी से फैल सकता है। हर साल करीब
40 करोड़ लोग इससे संक्रमित होते हैं। हाल के वर्षों में डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं। डेंगू के मामलों
में वृद्धि तेजी से शहरीकरण, जनसंख्या वृद्धि, वैश्वीकरण, जलवायु परिवर्तन, सामाजिक-आर्थिक
विकास और जीवन शैली में बदलाव के कारण एडीज वेक्टर की शुरुआत के कारण देखी गई है।
भारत में जलवायु परिवर्तन के अनेक झटके देखे जा रहे है। इनमें डेंगू और चिकनगुनिया जैसी
बीमारियां लगातार बढ़ती जा रही है। प.बंगाल में डेंगू का खतरा विकराल हो चुका हक़ जहाँ 40
हज़ार के आँकड़ों को छूने लगा है। देश के अन्य राज्यों में भी डेंगू अपने पैर फैला रहा है विश्व
स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हाल के दशकों में दुनिया भर में डेंगू के मामलों में अप्रत्यासित रूप
से वृद्धि हुई है। दुनिया की लगभग आधी आबादी अब डेंगू के खतरे में है और हर साल
अनुमानित 100-400 मिलियन संक्रमण होते हैं।
जलवायु परिवर्तन के फलस्वरूप मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है
कि अगर किसी को तीन से चार दिन तक उल्टी, तेज बुखार और चक्कर आ रहे हैं तो इसे
नजरंदाज न करें। तुरंत ब्लड सैंपल की जांच कराएं। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई है तो इलाज
कराएं। इस मामले में बिलकुल भी लापरवाही न बरतें। डेंगू फीवर जिसे ‘हड्डी तोड़ बुखार भी
कहां जाता हैं, भारत में तेजी से अपने पैर पसार रहा है। हर साल इस खतरनाक बीमारी के
अनियंत्रित हो जाने का मुख्य कारण यह हैं कि इसकी वैक्सीन अभी तक उपलब्ध नहीं हैं। डेंगू
की भयावहता का अंदाजा इसी पहलू से लगाया जा सकता है कि समय से उपचार न मिलने के
कारण रोगी की मौत भी हो जाती है। विशेषकर जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है वे
मौसमी बीमारियों का शिकार हो जाते है। देशभर से मिलने वाली खबरों के मुताबिक मौसम
परिवर्तन के साथ ही मौसमी बीमारियां और वायरल बुखार का प्रकोप पैर पसारने लगा है,
जिसके चलते चिकित्सालय में मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। मौसम परिवर्तन के
साथ ही सर्दी, खांसी- जुकाम, चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू, स्क्रब डेंगू, वायरल बुखार, उल्टी- दस्त
के रोगियों की संख्या बढ़ी है। मच्छरों का प्रकोप भी बीमारियां बढ़ाने में सहायक हो रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार तापमान में उतार-चढ़ाव के चलते मौसमी बीमारियां बढ़ी हैं। इस मौसम में
जोड़ों में दर्द, बदन दर्द, सिरदर्द, खांसी, जुकाम एवं बुखार होता है। बदलते मौसम में खान पान
में सतर्कता रखनी जरूरी है।
- बाल मुकुन्द ओझा