श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर झूमें श्रद्धालु
रामगजमण्डी। आनन्द विहार कालोनी स्थित आनन्द धाम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन कथावाचक सुरेश बिहारी नागर ने कृष्ण की बाल लीलाओं को सुनाते हुए कहा कि भगवान प्रेम के वशीभूत है। इसीलिए भगवान बाल कृष्ण को ताहि अहीर की छोहरियां छछिया भर छाछ पे नाच नचाती हैं । कथा में गाये गये भजनों "गिर ना पढ़ें रे गिरिवर गिरधारी , गिरिवर हम पर गिर ना पढ़े" ...पर महिला व पुरुष श्रोता भी खड़े होकर झूमने लगे । कथा में गोकुल में नंदोत्सव, भगवान शंकर द्वारा श्री कृष्ण के दर्शन की लीला , पूतना वध , नामकरण संस्कार , यमार्रजुन दामोदर लीला , गोकुल से वृन्दावन गमन , कालिया मर्दन लीला , गिरी गोवर्धन की पूजा , महारास एवं कंस वध सहित कृष्ण की कई बाल लीलाओं के दृष्टांत सुनाये गये। कथा में महतपुर धाम पंजाब के सन्त करमदास महाराज भी पधारे। आरती से पहले महाराज के प्रवचन हुए उन्होंने कहा कि हमें यह नर तन पिछले कई जन्मों के अच्छे कर्मों के फलस्वरूप प्राप्त हुआ है इसे बेकार नहीं जाने दे , इसे अच्छे कार्यों में व प्रभू सेवा में लगायें । आप बढ़े ही भाग्यशाली है जो आपको कृष्ण कथा सुनने को मिल रही है। कथा जीवन जीने की कला सिखाती है । कथा हमें यह बताती है कि हमें क्या करना चाहिए व क्या नहीं करना चाहिए। यदि इन्सान कथा में सुनी एक भी बात को भी अपने जीवन आचरण में उतार लें तो उसका जीवन सफल हो जाता है ,उसका कल्याण हो जाता है वह भवसागर से पार हो जाता है । कथा के अन्त में प्रतिदिन की तरह 21 जोड़ों द्वारा आरती की गई फिर प्रसादी वितरित की गई