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भगवान की भक्ति जीवन का सार - संत प्रहलाद महाराज 

भगवान की भक्ति जीवन का सार - संत प्रहलाद महाराज 

 
 
रतनगढ़ । कथा सुनने से मन के संदेह दूर होकर भगवान में प्रीति होती है व कथा सुनने मात्र से समस्त पापों का नाश हो जाता है। उक्त धर्म प्रवचन संत प्रहलाद महाराज ने भागवत कथा के समापन अवसर पर दिया। उन्होंने प्रातः प्रवचन में बताया कि भगवान को याद करने से जीवन में पवित्रता आती है व दुखों का नाश होता है। भक्ति तो भगवान मांगने पर ही देते हैं बिना मांगे नहीं देते। प्रभात फेरी का दीप जलाकर, पुष्प वर्षा कर ,रास्तों में रंगोलियां बनाकर भव्य अभिनंदन किया गया। महाराज ने आज कृष्ण सुदामा की मित्रता, श्री कृष्ण सत्यभामा प्रसंग की व्याख्या कर धर्म श्रद्धालुओं को भक्ति रस का एहसास कराया। गीता पाठ अभ्यास कर रहे बालक बालिकाओं को उपहार भी दिए गए। कथा समापन पर संत सानिध्य में कथा आयोजक अंबिकाप्रसाद हारीत अनुराग हारित ने परिवार सहित शोभायात्रा के साथ भागवत जी को गनेडीवाला रामचंद्र मंदिर पहुंचाया। आयोजक परिवार ने आयोजन सफल बनाने में सभी सहयोगियों से मिले अविस्मरणीय सहयोग के दिए हार्दिक आभार प्रकट किया। भागवत कथा में पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवा, पूर्व पालिकाध्यक्ष संतोषबाबू इंदौरिया, पालिका सदस्य नंदकिशोर भार्गव,पृथ्वीराज प्रजापति, सांवरमल माटोलिया, रामगोपाल मुरारका, राजकुमार मुरारका ,रामरतन प्रजापत, सुशील गौड़, सुरेश मिश्रा , रमेश मिश्रा,ओम मंगलहारा , मूलचंद सिंधी,चतुर्भुज गोस्वामी, ललित चौधरी ,रवि इंदौरिया, कपिल हारित, बनवारी लाल शर्मा, कथावाचक भाई पवन जोशी, कथा वाचिका कोमल किशोरी, वरिष्ठ पत्रकार मधुसूदन शर्मा, एडवोकेट सांवरमल चमडिया, हीरालाल नोहाल सहित बड़ी संख्या में धर्म श्रद्धालुओं ने कथा सुनकर आध्यात्मिक लाभ उठाया।

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