धनतेरस 10 नवंबर शुक्रवार को कार्तिक कृष्ण द्वादशी फि र त्रियोदशी
सीकर। दिवाली से पहले कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इस दिन को धन त्रयोदशी या धनवंतरि जयंती भी कहा जाता है। पंडित बद्रीनारायणात्मज रामावतार मिश्र ने बताया कि धनतेरस पर मां लक्ष्मी, भगवान धनवन्तरी और धन कुबेर की उपासना करने से घर में धन के भंडार कभी खाली नहीं होते हैं । इस त्योहार को धन और समृद्धि का कारक माना जाता है। धनतेरस से ही शुभ दीपोत्सव की शुरुआत होती है। रोशनी के इस त्योहार पर मां लक्ष्मी की कृपा रहती है। उससे पहले धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि की पूजा की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन से धन्वंतरि हाथों में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए धनतेरस के दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर की विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ ही शाम के वक्त परिवार की मंगलकामना के लिए यम के नाम का दीपक भी जलाया जाता है। धनतेरस को शास्त्रों में अबूझ व स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है। इस दिन सोने चांदी के आभूषण खरीदना शुभ माना जाता है इसके अलावा सभी प्रकार की खरीददारी स्थाई व चिरकाल तक सुख प्रदान करने वाली मानी है। धनतेरस नए घर में प्रवेश, नए व्यापार का आरंभ करना शुभ फलदाई बताया गया है। इस तरह करें पूजा धनतेरस पर शाम के वक्त कुबेर और धनवंतरि की स्थापना करनी चाहिए. दोनों के सामने घी का दीपक जरूर जलाना चाहिए. भगवान कुबेर को सफेद मिठाई और धनवंतरि को पीली मिठाई को भोग लगाया जाता है. पूजा के दौरान ? ह्रीं कुबेराय नम: का जाप करें। इसके बाद धनवंतरिस्तोत्र का पाठ करें। पूजा के बाद दीपावली पर कुबेर को धन स्थान पर और धनवंतरि को पूजा स्थान पर स्थापित करें।
धनतेरस पूजा शुभ मुहूर्त-
प्रदोषकाल सायं 5 बजकर 34 मिनट से रात 8 बजकर 13 मिनट तक
वृष लग्न सायं 5 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 47 मिनट तक
चौघडिय़ा मुहूर्त-
चरका चौघडिय़ा - प्रात: सूर्योदय से प्रात: 8 बजकर 8 मिनट तक
लाभ व अमृत का चौघडिय़ा- प्रात: 8 बजकर 8 मिनट से दिन में 10 बजकर 50 मिनट तक
शुभ का चौघडिय़ा - दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 1 बजकर 32 मिनट तक
चर का चौघडिय़ा - दोपहर 4 बजकर 14 मिनट से सूर्यास्त तक।