धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा फैसला, शिक्षा मंत्री पद से दिया इस्तीफा
नई दिल्ली। नीट-यूजी परीक्षा को लेकर देशभर में उठे सवालों और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को भेजे गए अपने त्यागपत्र में कहा कि उनका यह फैसला देश के विद्यार्थियों के भविष्य, सामाजिक माहौल और राष्ट्रीय एकता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि किसी भी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया या कानूनी उलझनों की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। उनका मानना है कि छात्र अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान दें, इसलिए मौजूदा परिस्थितियों में पद छोड़ना उचित कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की युवाशक्ति को भ्रम और भटकाव की राजनीति का हिस्सा नहीं बनने दिया जाना चाहिए।
अपने पत्र में उन्होंने बताया कि परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी मिलते ही सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी और संबंधित परीक्षा रद्द कर दी। इसके बाद लाखों अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई, जिसके नतीजे 16 जुलाई को घोषित किए गए।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भविष्य में परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए अगले वर्ष से नीट-यूजी परीक्षा कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। उनका कहना है कि इससे परीक्षा प्रक्रिया में भरोसा और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी।
धर्मेंद्र प्रधान ने स्वीकार किया कि इस पूरे घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी उन्होंने शुरुआत से ही महसूस की। हालांकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बनाने की कोशिश की, जिससे स्थिति और जटिल हुई।
अपने इस्तीफे के अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का सहयोग के लिए आभार जताया। साथ ही उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे आगे भी ओडिशा की जनता, देश के युवाओं और राष्ट्र की सेवा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहेंगे।