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विश्व एड्स दिवस पर परिचर्चा का आयोजन

विश्व एड्स दिवस पर परिचर्चा का आयोजन

डीडवाना। राजकीय बाँगड़ ज़िला चिकित्सालय में आज विश्व एड्स दिवस पर संस्थान के रोगियों के समूह के साथ परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें संस्थान के फिजिशियन डॉ सोहनलाल शर्मा ने उपस्थित जनसमूह को एड्स रोग के बारे में जानकारी देते हुए बताया की वर्तमान समय में एड्स पूरे विश्व में तेज़ी से प्रसारित होने वाली बीमारी है, जिससे ग्रसित रोगी की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और वो विभिन्न बीमारियों से ग्रसित होकर काल-कवलित हो जाता है। एड्स का प्रसारण मुख्यत: चार तरीक़ो से होता है, संक्रमित सुइयों-सिरिंज आदि के इस्तेमाल से, असुरक्षित शारिरिक सम्बन्ध बनाने से, असुरक्षित रक्ताधान से और माँ से बच्चे में। उन्होंने बताया कि अभी तक एड्स का कोई कारगर उपचार उपलब्ध नहीं हो सका है, सिर्फ़ बचाव ही सबसे महत्वपूर्ण है। हमेशा नई असंक्रमित सुई और सिरिंज उपयोग में लेवें, सुरक्षित शारीरिक सम्पर्क को नियम बना लेवे, बिना अति-आवश्यकता रक्ताधान ना करें और एचआइवी स्क्रीनिंग जाँच अधिकाधिक करवायें।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ श्रवण कुमार बाटन ने बताया कि एड्स से ग्रसित रोगी को ए आर टी(एंटी-रिट्रोवायरल थेरेपी) दी जाती है, जिसमे वायरस की सक्रियता कम करने के लिए दवाए दी जाती है। परन्तु सर्वोच्च वरीयता एड्स से बचाव को ही दी जानी चाहिए। संस्थान के तकनीकी अधिकारी अमरीश माथुर ने बताया कि बाँगड़ चिकित्सालय में एड्स की जाँच और उपचार के लिए राजस्थान स्टेट एड्स कण्ट्रोल सोसाइटी के तत्वावधान में समेंकित जाँच और उपचार केन्द्र (आईसीटीसी) संचालित है जहाँ नियमित रूप से एड्स जाँच की सेवाये उपलब्ध है, कोई भी व्यक्ति कार्यसमय में आकर एड्स जाँच और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकता है, ये पूरी तरह गोपनीय है और जाँच करवाने वाले व्यक्ति के बारे में कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती है। इसके अलावा प्रत्येक हर महिला की प्रसव पूर्व जाँच के दौरान, किसी भी सर्जिकल प्रोसीजर से पूर्व और प्रत्येक रक्तदान किए हुए ब्लड यूनिट की एचआईवी जाँच आवश्यक रूप से की जाती है। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति में इस तरह की बीमारियों का कोई स्थान नहीं है, संस्कृति के क्षरण की वजह से नैतिक मूल्यों का ह्वास हुआ और ऐसी बीमारियों का प्रसारण होने लगा। अपने निजी जीवन में संयमी बने रहने, अनेक साथियों के साथ शारीरिक सम्पर्क से बचने और सामाजिक बन्धनों का पालन भली-प्रकार करने पर भी एड्स जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है। चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ धनराज चौधरी ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया की ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को एड्स के बारे में जागरूक करें ताकी वो स्वयं भी संक्रमित होने से बच सके और अन्य लोगों को भी बचा सके। इस अवसर पर नर्सिंग अधीक्षक राजेन्द्र टाक, वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी गणेशाराम चौधरी, केयर टेकर हरीश गुर्जर, सैयद नासिर अली, रामकिशोर शर्मा, रतिपाल सिंह, रवीन्द्र सोलंकी आदि भी उपस्थित रहे।

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