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आटा आइडिया ! (व्यंग्य)

आटा आइडिया ! (व्यंग्य)

 

चाणक्य नीति कहती है कि-'विषादप्यमृतं ग्राह्यममेध्यादपि काञ्चनम्। रनीचादप्युत्तमां विद्यांस्त्रीरत्नं दुष्कुलादपि।।' यानि कि इस श्लोक का मतलब यह है कि यदि संभव हो सके तो जहर में से भी अमृत निकाल लेना चाहिए। यदि सोना गन्दगी में भी पड़ा हो तो उसे उठा लेना चाहिए, इसे स्वच्छ कर उपयोग में लाना चाहिए। अजी ! गोल्ड यानी कि सोना बहुत ही मूल्यवान वस्तु है। पाकिस्तान में मांग-पेट भरने के लिए भारत का गेहूँ जरूरी है और हमारी धर्मपत्नी जी के लिए 'गोल्ड' बहुत जरूरी है। पाकिस्तान में आटा 300 रूपये किलो हो गया और अपने देश में गोल्ड साठ हजारी। वैसे सोने का गणित और अर्थशास्त्र हमें कभी भी समझ में नहीं आया। अब भले ही सोना 'धातु वाला सोना' हो या 'नींद/सोने वाला सोना।' वैसे जब-जब सोने में आग लगती है तब-तब हमारी नींद उड़ जाती है। उधर  पाकिस्तान वालों की नींद उड़ी है, क्योंकि आटा नहीं है और आपको तो पता ही है कि आदमी के पेट में जब तक ढ़ाई-तीन सौ ग्राम आटा नहीं जाता, तब तक उसे चैन से नींद नहीं आती। यही हाल अपने देश का भी इसलिए है, क्योंकि यहाँ सब 'गोल्ड' के चक्कर में अपनी नींद गंवा बैठे हैं। आखिर अपना इंडिया, पाकिस्तान का पड़ौसी है, संगत का थोड़ा सा असर आना तो स्वाभाविक ही है। खैर, दोनों देशों की नींद तो उड़ी ही है। पाकिस्तान में गेहूँ की जमाखोरी से आटे की कीमतें बढ़ गई, अपने यहाँ 'गोल्ड प्रेम' और 'गोल्डखोरी' से कीमतें बढ़ गई। खैर, जब-जब हमारी धर्मपत्नी जी सोने की यानी कि 'गोल्ड' की हमसे डिमांड करती है तो हम उसे आटा खरीदकर ला देते हैं। आखिर 'आटा' सोने का बेहतरीन साधन है। हमने अर्थशास्त्र में पढ़ा है कि आटे और सोने(नींद) में सीधा संबंध पाया जाता है। अगर आप ज्यादा आटा खाओगे तो नींद भी ज्यादा आयेगी और कम आटा खाओगे तो नींद भी कम ही आयेगी। अब यह आप पर डिपेंड करता है कि आपको कितना सोना चाहिए ? आटा खाओ और सोना बढ़ाओ। वैसे भी, हम ठहरे अदने से लेखक। हम भला असली गोल्ड(सोने) की ऊंचाइयों तक कैसे पहुंच सकते हैं, क्योंकि गोल्ड तो हमारे देश की अर्थव्यवस्था की भांति लगातार बढ़ रहा है और सुना है कि हमारी अर्थव्यवस्था ने इंग्लैंड की अर्थव्यवस्था को भी पछाड़ दिया है। बहरहाल, जब-जब भी हमारी धर्मपत्नी जी की गोल्ड की डिमांड होती है तो हम उसे ढ़ेर सारा आटा खिलाकर उसे 'थपकियां और लोरी' देकर सुला देते हैं और उसकी 'सोने' की डिमांड स्वतः ही पूरी हो जाती है। हम भी अपनी धर्मपत्नी जी को ढ़ेर सारा आटा खिलाकर देश की अर्थव्यवस्था को करारी टक्कर दे रहे हैं। आखिर हमें भी तो 'सोने' में फर्स्ट पोजिशन हासिल करनी है। हमें पूरा यकीं हैं कि वेलेंटाइन-डे से पहले हम हमारी धर्मपत्नी जी की 'सोने की डिमांड' को पूरी कर देंगे और यह हमारा उनको 'वेलेंटाइन-डे' का बड़ा गिफ्ट होगा। वैसे, हम उसे यह भी समझाते हैं कि पगली ! ये दुनिया धातु वाले सोने के प्रति यूं ही बावली है। नींद वाला सोना दुनिया में सबसे कीमती है, क्योंकि अच्छी नींद/ अच्छे सोने से आदमी का स्वास्थ्य बना रहता है और 'हेल्थ इज वेल्थ।' हम अपनी धर्मपत्नी जी को बताते हैं कि -' अरी भागवान ! तुम देखो अब पाकिस्तान राजनीतिक और कूटनीतिक तरीक़े से भारत से गेहूँ की डिमांड उस वक्त कर रहा है, जब उसके भारत से रिश्ते अच्छे नहीं हैं। वह अपने सभी देशवासियों को आटा खिलाकर उन्हें 'सोने' में अभूतपूर्व राहत देना चाहता है और 'सोने' से अपनी अर्थव्यवस्था को टॉप पर ले जाना चाहता है, क्योंकि वैसे तो वो कंगाल है ही। लगता है कि पाकिस्तान ने परमाणु बम की भांति हमारे आटे वाला सोने का आइडिया चुरा लिया है, क्योंकि वो चोरी-चुकारी में हमेशा हमेशा से बड़ा माहिर किस्म का है। हमें भारी खेद है कि उसने हमारा 'सोने का आइडिया' चुराया। अब हम सोच रहे हैं कि हमारा और भारत का इस गुस्ताखी के लिए क्या स्टैंड होगा ?
 
(आर्टिकल का उद्देश्य पाठकों का स्वस्थ मनोरंजन करने तक ही सीमित है, किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं।)
 
 
सुनील कुमार महला,
स्वतंत्र लेखक व युवा साहित्यकार

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