दहेज हत्या मामला - सास और पति को सुनाया आजीवन कारावास
बहरोड़। दहेज हत्या के एक मामले में लगभग 11 साल बाद एडीजे सत्य प्रकाश सोनी ने सास और पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। विवाहिता और उसकी दो मासूम बेटियों की कुएं में शव कुएं में मिले थे। अपरलोक अभियोजक त्रिलोक चंद सैन ने बताया कि कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए विवाहिता की सास संतोष देवी 53 पत्नी विजयपाल और पति संदीप 31 पुत्र विजयपाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। गौरतलब है कि 13 सितंबर 2012 को झुंझुनू जिले के बुहाना थाना क्षेत्र के गांव अमरसर के रहने वाले कंवर सिंह पुत्र मेदाराम ने बहरोड़ पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। जिसमें बताया कि उसकी बेटी शर्मिला की शादी 5 फरवरी 2007 को बहरोड़ थाना क्षेत्र के गांव अकलीमपुर के रहने वाले संदीप पुत्र विजयपाल के साथ की गई थी। शादी के बाद कुछ दिन तक तो ठीक चला, लेकिन इसके बाद उसकी बेटी शर्मिला को पति संदीप, सास संतोष देवी, देवरानी संजू और ताया ससुर गजराज दहेज की मांग को लेकर परेशान करने लगे। ये लोग दहेज में पचास हजार रुपए मांगते थे। बहुत ज्यादा तंग करने पर मैंने यह रकम दे दी, लेकिन इसके बाद ये लोग एक लाख रुपए मांगने लगे। 27 अगस्त 2012 को आरोपियों ने दहेज की मांग को लेकर शर्मिला के साथ बेरहमी से मारपीट की। शर्मिला के दो लड़की थी। जिसमें कनक 3 वर्ष और दुर्गा 8 माह की थी। रिपोर्ट में कंवर सिंह ने बताया कि 12 सितंबर 2012 की रात करीब 10 बजे उसे सूचना मिली की शर्मिला अपनी दोनों बेटियों के साथ कुएं में गिर गई है। जिसके बाद पुलिस के साथ मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की सहायता से तीनों के शवों को बाहर निकाला। कंवरसिंह की रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया। जिसके बाद कोर्ट में सुनवाई हुई। जिसमें 23 गवाह पेश किये गये। 10 साल 9 महीने बाद सास और पति को आजीवन कारावास सुनाया गया।