शिक्षा नीति 2020 आधुनिक व महिला विरोधी तथा सांप्रदायिक - शुक्ला
रतनगढ़ - राजस्थान शिक्षक संघ (शे)का पांचवा राज्य परिषद सम्मेलन प्रेम सिंह चौधरी नगर एवं दुर्गाराम मोगा मंच टाउन हॉल रतनगढ़ में प्रदेश अध्यक्ष महावीर सिहाग द्वारा झंडारोहण के साथ शुरू हुआ ।सम्मेलन के प्रथम दिन की अध्यक्षता हेमंत खराड़ी ,भूप सिंह कुकणा , अशोक लोदवाल ,भंवर लाल काला ,भंवर लाल कस्वा,याकूब खान , सुमन भानुका ने की । सम्मेलन में विभिन्न दुर्घटनाओं में मारे गए आमजन को श्रद्धांजलि दी । सम्मेलन का उद्धघाटन उद्बोधन देते हुए प्रदेशाध्यक्ष महावीर सिहाग ने कहा शिक्षकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि गैर शैक्षिक कार्यों से सरकार मुक्त नहीं करना चाहती है प्रदेश का शिक्षक गरीब किसानों मजदूरों के बच्चों को पढ़ाना चाहता है इसको लेकर सरकार को लगातार आंदोलन के माध्यम से प्रदेशभर का शिक्षक मुखरता से आवाज उठा रहा हैं।
प्रदेश का शिक्षक बीएलओ सहित समस्त गैर शैक्षिक कार्यों का बहिष्कार कर रहा है मगर सरकार इस और अपना ध्यान आकर्षित नहीं कर रही है यह बहुत चिंता की बात हैं इसलिए हमें आम जनता के साथ मिलकर सांझा संघर्ष करने की जरूरत है ।
संगठन एक रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए राज्य महामंत्री उपेंद्र शर्मा ने कहा कि यह सत्र हमारा संघर्षों का साल रहा है ,राजस्थान के शिक्षकों ने सार्वजनिक शिक्षा व शिक्षकों के हित तथा भविष्य की पीढ़ी को सुरक्षित करने के लिए लगातार संघर्षरत किया है, हमने लगातार बहादुरी के साथ ऐतिहासिक संघर्ष किए हैं खासकर के शैक्षणिक ढांचे को बचाने के लिए वतृतीय श्रेणी अध्यापकों के स्थानांतरण नीति से स्थानान्तरण करने ,गैर शैक्षिक कार्यों से मुक्त करने और पीएफआरडीए बिल रद्द कर देशभर में ओ पी एस लागू करने जैसे ज्वलंत मांगों को लेकर 8 नवंबर 2022 से आज तक लगातार संघर्ष किया हैं।
उन्होंने कहा कि चुरू के साथियों ने जबरदस्त तरीके से बीएलओ का बहिष्कार कर सरकार को चेतावनी दे दी है साथ ही साथ प्रदेश सरकार शिक्षक भी बीएलओ कार्य का बहिष्कार करेगा और सरकार को मजबूर करेगा उन्होंने चिंता जताई की राजस्थान की सरकार ने संविदा नियम बनाकर भविष्य में नियमित भर्तियों खतरा पैदा कर दिया है। इसलिए शिक्षकों व सार्वजनिक शिक्षा बचाने के लिए शिक्षा के निजीकरण सांप्रदायिकरण के खिलाफ पंचायत से पंचायत स्तर तक जागृति अभियान चलाकर संघर्ष को तेज करने का आह्वान किया ।सम्मेलन में विशेष सत्र रखा गया जिसे इतिहास के प्राध्यापक सिद्धेश्वर शुक्ला दिल्ली विश्वविद्यालय में अपना व्याख्यान देते हुए नई शिक्षा नीति 2020 पर अपनी आलोचना रखी उन्होंने आलोचना करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति पर बात करते हुए
सरकारी संस्थान बचाने का बड़ा सवाल है यह नीति शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म करने की नीति है ,उन्होंने कहा कि नीति केंद्र की सत्ताधारी पार्टी की विचारधारा का प्रतिबिंब हैं, जो आने वाले समय में मनुवादी शिक्षा व न्याय लागू करेगी जो पूरी तरह से सांप्रदायिक और महिला विरोधी है तथा अब तक समाज के विकास को नकार कर आधुनिक शिक्षा को खत्म करना चाहती है नई शिक्षा नीति पूरी तरह से निजीकरण का समर्थन कर रही है और अध्यापकों के लिए एक तरह से भीख मांग कर गुजारा करने की ओर इशारा कर रही है आज सबसे ज्यादा खतरे में शहरों की स्कूलों की जमीनें हैं जिस पर पूंजीपतियों की नजरें गड़ी हुई इसलिए शिक्षा सबके लिए व बेहतर समाज निर्माण करने के लिए हमें शिक्षक को पढ़ने पढ़ाने की मुहिम को तेज करते हुए स्वयं को भी बहुत ही उच्च कौशल विकसित करना पड़ेगा जिसमें हमें स्वयं को भी अत्यधिक पढने पर जोर देना होगा ।सरकार की गलत नीतियों का विरोध करने के साथ-साथ स्वयं को भी विकल्प तैयार करते हुए हमें काम करना होगा सम्मेलन में बाड़मेर से जिला अध्यक्ष भगवाना राम जाखड़, प्रांतीय सदस्य दिलीप बिरड़ा, जिला उपाध्यक्ष भोमाराम गोयल,जिला मंत्री विनोद पूनिया, दीनदयाल सिंह,अनिल परमार,विश्वदत्त गोयल ,सुमेर सेन आदि ने चर्चा में भाग लिया।