आचार्य संगोष्ठी में शैक्षिक नवाचारों व राष्ट्र में भूमिका पर हुई चर्चा
नाहरगढ़। विद्या भारती के विद्यालय में होने वाली वंदना सभा विद्यार्थियों में संस्कार देने का सबसे प्रभावी माध्यम होता है। पठन-पाठन प्रारंभ करने से पूर्व प्रार्थना सभा के माध्यम से सभी ईश्वर से प्रार्थना करते हैं।जिससे शिक्षण के लिए आवश्यक वातावरण निर्माण होता है तथा भारतीय संस्कार बाल मन मे पल्लवित होते हैं।वंदना में प्रातः स्मरण एकात्मता स्त्रोतम , एकता मंत्र,अष्टादश श्लोकी गीता, दीप मंत्र सरस्वती वंदना, ध्यान, गायत्री मंत्र, मातृ वंदना, शांति पाठ शामिल किया गया है वंदना व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का माध्यम हैं।आज विद्या भारती के विद्यालय की वंदना सभा ने समाज में अलग ही पहचान बनाई है। बालकों को जीवन में विद्याध्ययन करते हुए पांच प्रणाम करना चाहिए जिससे परिणाम बदल जाते हैं यह उद्गार आदर्श विद्या मंदिर नाहरगढ़ के वंदना दर्शन कार्यक्रम में विद्या भारती के जिला सचिव राजेंद्र कुमार शर्मा ने व्यक्त किये।
इस अवसर पर जिला बौद्धिक प्रमुख राजेश नामा ने वन्दना दर्शन कार्यक्रम में वन्दना कार्यक्रम व स्वच्छता, अर्द्धवार्षिक परीक्षा की जानकारी दी। कार्यक्रम का शुभारंभ वाग्देवी मां सरस्वती, ओमकार व मां भारती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।अतिथियों का स्वागत प्रधानाचार्य सत्यनारायण पांचाल ने किया।राष्ट्रगान से वन्दना सभा के सत्र का समापन हुआ साथ ही विद्यालय के योग प्रमुख प्रवीण साहू का जन्मदिन भारतीय पद्धति से मनाया गया।वन्दना प्रमुख आशु यादव, स्वच्छता प्रमुख नीलम शर्मा ने आभार व्यक्त किया। सुरेन्द्र नागर, इंद्रराज नागर, वर्षा साहू, मीनाक्षी कुशवाहा, मधु खण्डेलवाल, रणजीत साहू का विशेष योगदान रहा।