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चीन-तुर्की की बढ़ती नजदीकियों पर ईटीजीई को ऐतराज, बोली- दमन को मिल रहा बढ़ावा

चीन-तुर्की की बढ़ती नजदीकियों पर ईटीजीई को ऐतराज, बोली- दमन को मिल रहा बढ़ावा

वाशिंगटन । ईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट इन एग्जाइल (ईटीजीई) ने चीन और तुर्की के बीच बढ़ते सहयोग की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि इससे चीन को शिनजियांग (ईस्ट तुर्किस्तान) में अपने दमनकारी अभियान को और तेज करने का हौसला मिल रहा है। यह प्रतिक्रिया 16 जुलाई को बीजिंग में चीन के उप विदेश मंत्री मियाओ देयू और तुर्की की उप विदेश मंत्री बेरीस एकिनजी के बीच हुई राजनीतिक वार्ता के बाद सामने आई। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में दोनों देशों ने कानून प्रवर्तन और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की। वहीं तुर्की ने 'वन चाइना' नीति के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए कहा कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल चीन की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ नहीं होने देगा। ईटीजीई ने इस वार्ता की आलोचना करते हुए कहा कि यह उइगर, कजाख, किर्गिज और अन्य तुर्की समुदायों के साथ दशकों से हो रहे विश्वासघात का नया अध्याय है। संगठन का आरोप है कि शिनजियांग एक "कब्जे वाला क्षेत्र" है और वहां चीन दमनकारी नीतियां लागू कर रहा है। निर्वासित सरकार ने कहा कि यह "कूटनीति नहीं, बल्कि मिलीभगत" है। उसके अनुसार, पिछले लगभग तीन दशकों से तुर्किये चीन के साथ मिलकर ईस्ट तुर्किस्तान के स्वतंत्रता आंदोलन की निगरानी, उसे कमजोर करने और उसके समर्थकों पर दबाव बनाने में सहयोग कर रहा है। ईटीजीई के विदेश मंत्री सालिह हुदायर ने कहा कि उन्होंने पहले तुर्की से ईस्ट तुर्किस्तान के लोगों के पक्ष में आवाज उठाने की अपील की थी, लेकिन इसके बजाय अंकारा चीन के साथ अपना सहयोग बढ़ा रहा है।संगठन ने आरोप लगाया कि इस सहयोग के कारण विदेशों में रह रहे ईस्ट तुर्किस्तानी शरणार्थियों और प्रवासी समुदाय पर दबाव बढ़ रहा है तथा उनके स्वतंत्रता आंदोलन को कमजोर किया जा रहा है। ईटीजीई ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुर्की की कथित भूमिका की निंदा करने, शिनजियांग में मानवाधिकार उल्लंघनों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने और ईस्ट तुर्किस्तान के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करने की अपील की।

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