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यूएई के अल-हमरा में ‘डेजर्ट साइक्लोन–II’ अभ्यास का सफल समापन

यूएई के अल-हमरा में ‘डेजर्ट साइक्लोन–II’ अभ्यास का सफल समापन

जयपुर। अबू धाबी (यूएई) के अल-हमरा ट्रेनिंग सिटी में भारत–यूएई संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डेजर्ट साइक्लोन–II’ का सफल समापन हुआ। यह अभ्यास भारतीय सेना और संयुक्त अरब अमीरात की थल सेना के बीच संयुक्त प्रशिक्षण का दूसरा संस्करण था। जन संपर्क अधिकारी (रक्षा) लेफ्टिनेंट कर्नल निखिल धवन ने बताया कि 18 से 30 दिसंबर तक आयोजित यह संयुक्त अभ्यास दोनों देशों के बीच गहरी रक्षा साझेदारी का प्रतीक है और क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अभ्यास के दौरान शहरी वातावरण में अंतर-संचालनीयता, आपसी विश्वास तथा परिचालन तालमेल को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके लिए कक्षा आधारित प्रशिक्षण और क्षेत्र आधारित अभ्यासों का संतुलित संयोजन किया गया। संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के अंतर्गत उप-पारंपरिक अभियानों पर विशेष बल दिया गया। संयुक्त प्रशिक्षण गतिविधियों में शहरी युद्ध के मूल सिद्धांत, इमारतों की मार्किंग एवं क्लियरिंग, आईईडी के प्रति जागरूकता, घायलों की निकासी, प्राथमिक चिकित्सा तथा विस्तृत मिशन योजना जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल रहे। सैनिकों ने निर्मित क्षेत्रों में क्रमिक रूप से उन्नत व्यावहारिक अभ्यास किए, जिनमें कमरों में प्रवेश एवं इमारतों की सुरक्षा, हेलीकॉप्टर आधारित संचालन, हवाई हमला तथा प्लाटून स्तर पर संयुक्त आक्रमण अभ्यास प्रमुख रहे। उन्होंने बताया कि रूम इंटरवेंशन और सुरक्षा से संबंधित अभ्यासों का दोनों सेनाओं के बीच पारस्परिक आदान-प्रदान किया गया, जिसके बाद उनका संयुक्त पूर्वाभ्यास हुआ। इससे रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं के मानकीकरण को प्रभावी रूप से बढ़ावा मिला। प्रशिक्षण का समापन एकीकृत आक्रामक एवं रक्षात्मक शहरी अभियानों के साथ हुआ, जिसमें संयुक्त कार्रवाई और संयुक्त ऑपरेशनल तत्परता का प्रदर्शन किया गया। ले. कर्नल धवन ने बताया कि इस अभ्यास में भारतीय सेना की सप्त शक्ति कमांड के 45 जवान शामिल थे, जिनमें अधिकांश मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री रेजिमेंट की एक बटालियन से थे, जबकि यूएई थल सेना की ओर से 53 मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री बटालियन ने भाग लिया। ‘डेजर्ट साइक्लोन–II’ अभ्यास ने दोनों सेनाओं के बीच पेशेवर संबंधों को और मजबूत किया है तथा भविष्य के बहुराष्ट्रीय अभियानों के लिए अंतर-संचालनीय क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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