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भवानीमंडी में बढ़ रहा है नेत्रदान का कारवां, 97 वाँ नेत्रदान

भवानीमंडी में बढ़ रहा है नेत्रदान का कारवां, 97 वाँ नेत्रदान

भवानी मंडी. नेत्रदान के माध्यम से मृत्यु के बाद भी दुनिया को देखा जा सकता है, और दो लोगों के जीवन को रोशन किया जा सकता है, इसी से प्रेरित होकर भवानीमंडी में नेत्रदान के प्रति जागृति लगातार बढ़ती जा रही है। नेत्रदान परिवार की परंपरा का हिस्सा बनता जा रहा है और ऐसा ही हुआ कि 10 वर्ष पहले स्वयं पहल करके पत्नी का नेत्रदान करवाने वाले पारस गोटावाला अपनी मृत्यु के पश्चात भी नेत्रदान के माध्यम से दो लोगों को नई नेत्र ज्योति दे गए।
भारत विकास परिषद के नेत्रदान प्रभारी एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन के ज्योति मित्र कमलेश दलाल ने बताया कि जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संध के संरक्षक 67 वर्षीय पारस गोटावाला का रात्रि 7 बजे हृदयाघात से आकस्मिक निधन के पश्चात, जैन सोशल ग्रुप के रीजनल अध्यक्ष विवेक जैन पीन्टू द्वारा प्रेरित करने पर मृतक के पुत्र प्रतीक एवं परिवार ने तुरंत ही उनके नेत्रदान का निर्णय लिया, एवं विवेक जैन द्वारा सूचना देने पर शाइन इंडिया फाउंडेशन के उत्कर्ष मिश्रा ने ज्योति-रथ से भवानीमंडी पहुंचकर रात्री 11 बजे कोर्निया प्राप्त किया। समाजसेवी स्वभाव के होने के कारण पारस गोटावाला की मृत्यु के बाद घर पर बड़ी संख्या में आस-पड़ोस एवं समाज के लोग एवं रिश्तेदार उपस्थित थे, घर पर उपस्थित सभी परिवारजनों एवं समाज सदस्यों एवं दूर-दराज के रिश्तेदारों के बीच नेत्रदान संपन्न हुआ, उपस्थित सभी व्यक्तियों ने नेत्रदान प्रक्रिया को देखा और और जाना की नेत्रदान में किसी भी तरह की चेहरे पर विकृति नहीं आती है, इसमें केवल आंखों के ऊपर की झिल्ली जिसे कोर्निया कहा जाता है को ही लिया जाता है, इसमें पूरी आंख नहीं निकाली जाती है, सभी के सामने यह रक्तहीन प्रक्रिया 15 मिनट में ही पूरी हो गई। नेत्रदान प्रक्रिया में मृतक के पुत्र प्रतीक एवं भाई धर्मचंद्र, अभयकुमार, दिलीप, मनोहर एवं शेखर गोटावाला ने सहयोग किया।
शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ कुलवंत गौड़ के अनुसार पारस गोटावाला कोर्निया अच्छा पाया गया है, जिसे आई बैंक जयपुर भिजवा दिया गया है। जहां यह दो असहाय नेत्रहीनों को नई नेत्रज्योति प्रदान कर सकेगा।
नेत्रदान प्रभारी कमलेश दलाल के अनुसार शाइन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से यह भवानीमंडी क्षेत्र से प्राप्त 97 वाँ नेत्रदान है, एवं इस वर्ष का यह 22 वाँ नेत्रदान प्राप्त हुआ है। पारस गोटावाला भवानीमंडी के नेत्रदान कार्यक्रम के प्रारंभ से ही सहयोगी थे एवं 15 अक्टूबर 2013 को अपनी धर्मपत्नी कामिनी देवी गोटावाला के स्वर्गवास के पश्चात भी उन्होंने स्वयं पहल करके उसका नेत्रदान करवाया था।
श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन श्री संघ के सचिव विवेक जैन ने बताया कि पारस गोटावाला की मृत्यु का समाचार जैसे ही जैन समाज में प्रसारित हुआ सभी ने अत्यन्त दुख को महसूस किया, दादा के नाम से लोकप्रिय पारस गोटावाला समाज के धार्मिक आयोजनों में हमेशा आगे रहने के साथ-साथ गरीबों के लिए और जरूरतमंदों के लिए हमेशा तैयार रहते थे, किसी भी तरह की परेशानी को लेकर लोग उनके पास आते थे तो वह मुस्कुराकर उनका हल निकालते थे, इसीलिए उनके निधन के पश्चात पूरे समाज एवं आस-पड़ोस में एक शोक की लहर फैल गई।

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