बेर की खेती कर किसान कमा रहा है हजारों रुपए प्रति वर्ष
दौसा . जिले का एक किसान लगातार खेती करता आ रहा है अब वह किसान बड़े-बड़े बगीचे लगाकर खेती करने लगा है । किसान अब गेहूं की जैविक खेती के साथ साथ अन्य खेती भी कर रहा है।
जबरदस्ती से लगाए गए थे बेर के पेड़
गीजगढ़ निवासी किसान शिवचरण सैकड़ा ने बताया कि 1988 में कृषि विभाग के सहायक अधिकारी के द्वारा जबरदस्ती से बेर के पेड़ लगाए गए थे. बेर के पेड़ तो लगा दिए लेकिन उनकी बिक्री ठीक नहीं हुई ।
प्रशिक्षण पर गया तो बेर की बिक्री का मिला सुझाव
किसान शिवचरण सैकड़ा ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा किसानों का एक टूर ले जाया गया और उसमें प्रशिक्षण दिया गया, जहां पर मुझे बेर बिक्री के बारे में जानकारी मिली। उस समय हरियाणा के किसान की 30 रूपए प्रति किलो के हिसाब से बेर की बिक्री हो रही थी और हमारे यहां मात्र एक 2 रूपए प्रति किलो के हिसाब से बिक्री हो रही थी ।तब बस में सवार होकर किसान दिल्ली पहुंचा और वहां पर 28 रूपए प्रति किलो के हिसाब से बेर की बिक्री की गई तब और बड़ा पेड़ लगाने का हौसला.
बेर के भाव अधिक मिले तो लगाए पेड़
किसान शिवचरण ने बताया कि जब दिल्ली जाने से बेर के भाव अच्छे मिलने लगे तो उसके बाद में इनकम भी बढ़ाने लगी। तब मन में विचार आने लगा तो किसान के द्वारा 1993 में करीब 200 पेड़ खेत में लगाए। उस समय खेत भी ठीक नहीं था. खेत भी टीले के रूप में था उसे ठीक करने के बाद और पेड़ लगाए। अब किसान के खेत में लगभग 800 पेड़ बेरडी के लगे हुये है।
प्रतिदिन बेर तोड़ने के लिए आते हैं 10 मजदूर
किसान शिवचरण ने बताया किसीजन के समय प्रतिदिन 10 मजदूर बेर तोड़ने के लिए आते हैं। बेर के पेड़ बड़े हैं तो सिडी लगाकर बेर तोड़ने का काम मजदूर करते हैं । किसान का कहना है कि क्षेत्र में मजदूर बहुत कम मिलते हैं जो भी किसान को मजदूर मिलते हैं वह समय पर नहीं मिल पाते जिसके कारण भी परेशानी होती है।
अब किसान के घर से ले जाते हैं व्यापारी बेर
किसान ने बताया कि पहले बेर बेचने के लिए काफी परेशानी हुआ करती थी लेकिन अब बेर बेचने में परेशानी नहीं होती। या तो व्यापारी घर से आकर ही बेर की खरीदारी कर लेते हैं या फिर दिल्ली सहित अन्य राज्यों में बेर की सप्लाई की जाती है । अच्छे दाम वहां से मिल जाते हैं। किसान का कहना है कि अन्य किसानों को भी इस तरीके के बगीचे लगाने चाहिए जिससे नगद आमदनी हो सके।