मौसम के बदलते हालात पर चने फसल के प्रति जागरूक रहे किसान
बारां। संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार अतीश कुमार शर्मा ने बताया कि बदलते हुए मौसम के हालात तथा वातावरण में आर्द्रता बनी रहने के कारण व दैनिक तापमान में कमी एवं बढ़ोतरी होने के कारण चना फसल में फली छेदक कीट का प्रकोप देखने में आ रहा है। इस कीट की हरे रंग की लट 1.25 इंच लम्बी, 0.25 इंच मोटी होती है बाद में भूरे रंग की हो जाती है। शुरुआत में चने की पत्तियों को खाती है। फली में मुंह घुसाकर दाना खाती है, तथा दाने को खोखला कर देती है और विभिन्न रूप बदलती है। पहले हरी, फिर हरी-चितकबरी व पूर्ण विकसित होने पर डन्डेदार हो जाती है। किसानांे को मौसम के हालात के अनुसार जागरूक रहने की जरूरत है।
नियंत्रण के उपाय
प्रारम्भिक अवस्था में बैसिलस थूरीनजेन्सिस 750 मि.ली. अथवा एनपीवी 250 एलई 1 लीटर प्रति हेक्टेयर तथा फूल आने से पहले अथवा फली बनने के बाद मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत चूर्ण का 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करें या मैलाथियान 50 ईसी या क्यूनालफास 25 ईसी 1.0 लीटर या प्रोफेनोफॉस 50 ईसी 1.5 लीटर का प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। पक्षी आश्रय के लिए टी आकार की 40-50 खपच्चियां प्रति हैक्टेयर लगाए। 4-6 फेरोमोन ट्रेप प्रति हैक्टर का उपयोग करें। फूल व फली बनते समय 3 प्रतिशत तम्बाकू की पती का घोल बनाकर छिड़काव करे।