कृषक स्वयं कर सकते है बुवाई के लिए सोयाबीन बीज तैयार
कोटा । जिला में खरीफ मौसम में मुख्य रूप से सोयाबीन, मक्का, उड़द एवं धान फसलो की बुवाई 2 लाख 56 हजार 960 हैक्टयर में प्रस्तावित है। सोयाबीन एक स्वपरागित फसल है जिसके बीज को हर वर्ष बदलने की आवष्यकता नहीं रहती इसका एक बार बीज बदल दिया गया है तो उसके बीज के उत्पादन को आगे आने वाले 2-3 वर्षो तक बुवाई के काम लिया जा सकता है। जिससे फसल के उत्पादन पर कोई विपरित प्रभाव नहीं पड़ता है और ना ही उत्पादन में कमी आती है।
संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार खेमराज शर्मा ने बताया कि सबसे अधिक बुवाई का रकबा सोयाबीन के अन्तर्गत 1 लाख 82 हजार हैक्टेयर रहने की सम्भावना है जिसके लिए लगभग 1 लाख 50 हजार क्विटंल सोयाबीन बीज बुवाई की आवष्यकता रहेगी। उन्होंने कृषकों से आव्हान किया है कि उपलब्ध बीज अथवा अन्य कृषकों के पास उपलब्ध बीज को क्रय कर उसकी सफाई एवं स्पाइरल सीड ग्रेडर से ग्रेडिंग कर बीज तैयार कर बुवाई के काम ले सकते हैं। किसान साफ किये हुए बीज की बुवाई पूर्व अंकुरण की जांच अवष्य करें।
ऐसे करें कृषक बीज अंकुरण की जांचः-
सोयाबीन बीज के अंकुरण की जंाच के लिए 100 दाने लें, उन्हें गीले किए हुए टाट बोरे में रखकर देखें एवं प्रतिदिन टाट बोरे को पानी के छींटे देकर गीला कर दें। 2-3 दिन बाद बीजों का अंकुरण हो जायेगा। यदि 100 दानों में से 70 दानों का स्वस्थ अंकुरण होता है तो 80 किलो बीज प्रति हैक्टयर बुवाई के लिए काम लें, यदि अंकुरण 60 प्रतिषत तक होता है तो बीज दर उसी अनुपात में बढ़ा दें। 50 प्रतिषत से कम अंकुरण होने पर बीज की बुवाई ना करें उसकी जगह दूसरा बीज काम लेवें।
प्रयोगषाला में निःषुल्क बीज की जांचः-
कृषि विभाग द्वारा कृषकों को सुविधा दी गई है कि कोई भी किसान अपने पास रखे हुए बीज की अंकुरण जांच करवाना चाहता है तो बीज परीक्षण प्रयोगषाला कारखाना बॉग द्वारा निःषुल्क बीज की जांच की जाती है। इसके लिए 1 किलोग्राम बीज का नमूना एक थैली में पैक कर उसपर अपना नाम व पता एवं एक सादा कागज पर आवेदन कर सकते हैं। नमूना जांच के लिए सीधे भी भेज सकते हैं अथवा संबंधित सहायक कृषि अधिकारी के माध्यम से कार्यालय संयुक्त निदेषक कृषि (विस्तार) में जमा करा सकते हैं।
स्पाइरल सीड ग्रेडर पर विभाग दे रहा अनुदान-
विभाग द्वारा स्पाइरल सीड ग्रेडर पर अनुसूचित जाति, जनजाति एवं लघु सीमान्त कृषकों को 50 प्रतिषत या अधिकतम 10 हजार रूपये व सामान्य कृषकों को 40 प्रतिषत या अधिकतम 8 हजार रूपये अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है। जिन कृषकों को स्पाइरल सीड ग्रेडर की आवष्यकता है वे अपना आवेदन ई-मित्र के माध्यम से राज किसान साथी पोर्टल पर कर सकते हैं।
कृषकों को होगा फायदाः-
जो कृषक स्वयं का बीज बुवाई के काम में लेंगे उन्हें बाजार से महंगा बीज क्रय नहीं करना पड़ेगा और लागत में कमी आयेगी एवं उत्पादन में भी कोई कमी नहीं आयेगी।
संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार खेमराज शर्मा ने बताया कि सबसे अधिक बुवाई का रकबा सोयाबीन के अन्तर्गत 1 लाख 82 हजार हैक्टेयर रहने की सम्भावना है जिसके लिए लगभग 1 लाख 50 हजार क्विटंल सोयाबीन बीज बुवाई की आवष्यकता रहेगी। उन्होंने कृषकों से आव्हान किया है कि उपलब्ध बीज अथवा अन्य कृषकों के पास उपलब्ध बीज को क्रय कर उसकी सफाई एवं स्पाइरल सीड ग्रेडर से ग्रेडिंग कर बीज तैयार कर बुवाई के काम ले सकते हैं। किसान साफ किये हुए बीज की बुवाई पूर्व अंकुरण की जांच अवष्य करें।
ऐसे करें कृषक बीज अंकुरण की जांचः-
सोयाबीन बीज के अंकुरण की जंाच के लिए 100 दाने लें, उन्हें गीले किए हुए टाट बोरे में रखकर देखें एवं प्रतिदिन टाट बोरे को पानी के छींटे देकर गीला कर दें। 2-3 दिन बाद बीजों का अंकुरण हो जायेगा। यदि 100 दानों में से 70 दानों का स्वस्थ अंकुरण होता है तो 80 किलो बीज प्रति हैक्टयर बुवाई के लिए काम लें, यदि अंकुरण 60 प्रतिषत तक होता है तो बीज दर उसी अनुपात में बढ़ा दें। 50 प्रतिषत से कम अंकुरण होने पर बीज की बुवाई ना करें उसकी जगह दूसरा बीज काम लेवें।
प्रयोगषाला में निःषुल्क बीज की जांचः-
कृषि विभाग द्वारा कृषकों को सुविधा दी गई है कि कोई भी किसान अपने पास रखे हुए बीज की अंकुरण जांच करवाना चाहता है तो बीज परीक्षण प्रयोगषाला कारखाना बॉग द्वारा निःषुल्क बीज की जांच की जाती है। इसके लिए 1 किलोग्राम बीज का नमूना एक थैली में पैक कर उसपर अपना नाम व पता एवं एक सादा कागज पर आवेदन कर सकते हैं। नमूना जांच के लिए सीधे भी भेज सकते हैं अथवा संबंधित सहायक कृषि अधिकारी के माध्यम से कार्यालय संयुक्त निदेषक कृषि (विस्तार) में जमा करा सकते हैं।
स्पाइरल सीड ग्रेडर पर विभाग दे रहा अनुदान-
विभाग द्वारा स्पाइरल सीड ग्रेडर पर अनुसूचित जाति, जनजाति एवं लघु सीमान्त कृषकों को 50 प्रतिषत या अधिकतम 10 हजार रूपये व सामान्य कृषकों को 40 प्रतिषत या अधिकतम 8 हजार रूपये अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है। जिन कृषकों को स्पाइरल सीड ग्रेडर की आवष्यकता है वे अपना आवेदन ई-मित्र के माध्यम से राज किसान साथी पोर्टल पर कर सकते हैं।
कृषकों को होगा फायदाः-
जो कृषक स्वयं का बीज बुवाई के काम में लेंगे उन्हें बाजार से महंगा बीज क्रय नहीं करना पड़ेगा और लागत में कमी आयेगी एवं उत्पादन में भी कोई कमी नहीं आयेगी।