यासीन अख्तर मिस्बाही का इंतकाल होने पर फातिहा का इंतजाम किया गया.
मकतब शहर में सुन्नी रजाकिया मस्जिद में अल्लामा यासीन अख्तर मिस्बाही का रविवार रात में इंतकाल हो जाने पर फातिहा का इंतजाम किया गया. जिसमें बच्चों ने कुरान ए पाक दुरूद ए पाक और कलीमा पढ़कर इसाले सवाब किया मौलाना शाहरुख रज़वी ने उनकी जिंदगी पर रोशनी डालते हुए बताया कि वह अपने वक्त के रईसुल कलम थे उन्होंने नौजवान नस्ल को लिखने के लिए उभारा और नए-नए कलमकार नौजवानों की शक्ल में हिंदुस्तान में पैदा किए वह अपने वक्त के इतिहासकार थे रईसुल कलम को इतिहासकार के रूप में जाना और पहचाना जाता है उन्होंने अपनी जिंदगी में दिल्ली में रहते हुए एक इदारा दारुल कलम के नाम से कायम किया जहाँ से इल्म की रोशनी को पूरे भारत में फैलाया आप कई किताबों के लेखक हैं महफ़िल के आखिर में दुआ हुई और बच्चों में मिठाई तकसीम की गई