जांभाणी हरि कथा का पांचवा दिवस
सूरतगढ़ . पूज्य गुरुदेव ने कहा कि मनुष्य को उसकी संगत का फल अवश्य मिलता है अच्छे, व्यक्ति विद्वान, साधु और ज्ञानी की संगत करनी चाहिए और ऐसा नहीं कर सकते तो अच्छी पुस्तकों की संगत कर लो अच्छी पुस्तकें पढ़नी चाहिए।
गुरुदेव ने कहा की लोहा पानी पर तैर नहीं सकता, परंतु जब लोहा लकड़ी की संगत कर लेता है तो पानी में तैरने लगता है। काठ की संगत लोहे की कील को पानी में डूबने नहीं देती, इसी प्रकार अच्छा महापुरुष आपके जीवन को भवसागर से पार कर देता है ।
वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों में आई गिरावट पर चिंता जताई । लोगों में प्रेम और भाईचारा कम हो रहा है तथा ईर्ष्या और द्वेष बढ़ रहे हैं । गुरु जंभेश्वर भगवान के बताए मार्ग पर चलकर, 29 नियमों का पालन करके हम अपना जीवन सुधार सकते हैं। 29 नियमों की आचार संहिता बनाकर गुरु जंभेश्वर भगवान ने एक नया रास्ता दिखाया है।
कथा में सुखराम बिश्नोई मंत्री राजस्थान सरकार भी पधारे। प्रधान भागीरथ कड़वासरा एवं अन्य प्रतिनिधियों ने उनकी अगवानी की मंत्री महोदय ने अपने उद्बोधन में पधारे हुए लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अपने बच्चों को संस्कार सिखाओ, उन्हें नशे से बचाओ । नौकरी मत ढूंढो । अपना कारोबार जमाओ, व्यापार करो, सरकार सबको नौकरी नहीं दे सकती। बच्चे को अच्छी शिक्षा दो । अशिक्षित व्यक्ति तो खेती भी नहीं कर सकता। प्रधान भागीरथ कड़वासरा ने कल के कार्यक्रम जिसमे पूर्व मुख्यमंत्री पधारी थी, उसे सफल बनाने के लिए सभी का धन्यवाद और आभार व्यक्त किया।आसपास के गांव ढाणी और कस्बों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण हेतु पधारे।