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आध्यात्मिक को भूलना नतीजा विध्वंस

आध्यात्मिक को भूलना नतीजा विध्वंस

युगो युगो से चले आ रहे हैं जर जोरू और जमीन के लिए खून खराबे, लूटपाट से इतिहास भरा पड़ा है। लेकिन आजकल का इतिहास जंग करो और जमींदोज कर दो इसी पैटर्न पर चल रहा है पिछले कई वर्षों से हम यह देख रहे हैं ईरान, सूडान, अफगानिस्तान और अब यूक्रेन में हुई तबाही इसी पैटर्न का परिणाम है। आखिर क्यों इतनी विकासशीलता के बाद हम इस तबाही के मंजर को देख रहे हैं। कहीं ना कहीं यह हमारे दक्षा के हथियारों में हुए विकास का दुष्परिणाम है जैसे कि मिसाइल, परमाणु बम आधुनिक बम बार्डिंग करने वाले विमान आदि। आजकल इसी बल पर एक देश दूसरे देश को सरेआम धमकी देता है लगता है विश्व में गुंडों की बस्ती (देश) भी बन रही है। अनेक शरीफ देश भी है जो शांति का जीवन चाहते हैं।
विश्व में आध्यात्मिकता को ज्यादा विकसित होना था ज्यादातर उसी की मान्यता अनुसार आम जनता की जीवन शैली को बनाए रखना था। यदि आध्यात्मिकता का भाव होता है तो ना तो कश्मीर से कश्मीर पंडित को जाना पड़ता और यूक्रेन से लोगों को जाना पड़ता।
यदि आध्यात्मिकता का भाव सरकार और उनसे जुड़े कर्मचारी मैं रहता है तो नाही नक्सलवाद, लिट्टे और ना ही बागी होते। कहते है जब जनता लूट चुकी, उसके साथ बहुत अन्याय होता है और वह कानून से सुरक्षा और न्याय नहीं पाता तब जाकर वह हथियार उठाता है।

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