पूर्व राष्ट्रपति यून की मुश्किलें बढ़ीं, अदालत सुनाएगी बड़ा फैसला
सोल। दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल से जुड़े बहुचर्चित मामले में इस सप्ताह बड़ा कानूनी फैसला आने वाला है। सोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट शुक्रवार को उन पर लगाए गए आरोपों की सुनवाई करते हुए अपना निर्णय सुना सकता है। इस मामले पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।
यून सुक येओल पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया और ऐसे कदम उठाए जिनसे राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक व्यवस्था प्रभावित हुई। अभियोजन पक्ष का दावा है कि अक्टूबर 2024 में उन्होंने सैन्य स्तर पर ऐसी गतिविधियों को मंजूरी दी, जिनका उद्देश्य बाद में मार्शल लॉ लागू करने के लिए माहौल तैयार करना था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस कथित योजना के तहत उत्तर कोरिया से जुड़े घटनाक्रमों का उपयोग राजनीतिक और सुरक्षा तर्क के रूप में किए जाने की कोशिश की गई। इसी संदर्भ में उन पर दुश्मन को लाभ पहुंचाने और अधिकारों के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
विशेष जांच दल की प्रमुख चो यून-सुक ने अदालत से यून के लिए 30 वर्ष की जेल की सजा की मांग की है। वहीं, यून ने पूछताछ के दौरान सभी प्रमुख आरोपों से इनकार किया और अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को अस्वीकार कर दिया।
फरवरी में गठित विशेष जांच दल ने हाल ही में यून से कई घंटों तक पूछताछ की थी। जांच मुख्य रूप से उन संदेशों और निर्णयों पर केंद्रित रही, जिनका कथित तौर पर मार्शल लॉ को उचित ठहराने में इस्तेमाल किया गया था।
इस मामले में केवल पूर्व राष्ट्रपति ही नहीं, बल्कि कई अन्य वरिष्ठ पूर्व सैन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। अदालत पूर्व रक्षा मंत्री और सेना के कुछ पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े मामलों पर भी फैसला सुना सकती है। इन पर सैन्य अभियानों के संचालन, अधिकारों के दुरुपयोग और सुरक्षा प्रक्रियाओं के उल्लंघन जैसे आरोप लगे हैं।
जांच एजेंसियों का दावा है कि कथित ड्रोन अभियान के कारण उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव बढ़ा था। साथ ही संवेदनशील सैन्य सूचनाओं के उजागर होने की आशंका भी जताई गई थी, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर माना गया।
गौरतलब है कि इससे पहले फरवरी में एक अन्य मामले में अदालत यून सुक येओल को उनके कथित असफल मार्शल लॉ प्रयास से जुड़े आरोपों में उम्रकैद की सजा सुना चुकी है। ऐसे में इस सप्ताह आने वाला फैसला उनकी कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों को और बढ़ा सकता है।