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खाद्यान्न से उर्वरक तक भरपूर भंडार, सरकार ने दी राहत की खबर

खाद्यान्न से उर्वरक तक भरपूर भंडार, सरकार ने दी राहत की खबर

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में खाद्यान्न, खाद्य तेल और उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि आवश्यक वस्तुओं का भंडार पर्याप्त मात्रा में मौजूद है और आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। सरकार के अनुसार मौजूदा स्टॉक और आयात की निरंतर प्रक्रिया के चलते निकट भविष्य में किसी प्रकार की कमी की आशंका नहीं है।

उपभोक्ता मामलों के विभाग की ओर से आयोजित अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बताया गया कि केंद्रीय पूल में गेहूं का भंडार निर्धारित बफर मानक से काफी अधिक है। 28 मई तक सरकारी भंडार में 513 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपलब्ध था, जबकि 1 जुलाई के लिए निर्धारित न्यूनतम बफर मानक 275.80 लाख मीट्रिक टन है। इसके अलावा रबी विपणन सत्र के दौरान गेहूं खरीद लगभग 350 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुकी है और खरीद प्रक्रिया जून के अंत तक जारी रहेगी।

चावल की स्थिति भी मजबूत बताई गई है। सरकार के पास 397 लाख मीट्रिक टन चावल का भंडार मौजूद है, जो निर्धारित बफर स्तर से कहीं अधिक है। इसके अतिरिक्त बड़ी मात्रा में खरीदा गया धान अभी मिलिंग प्रक्रिया में है, जो आगे चलकर चावल के स्टॉक को और बढ़ाएगा।

खाद्य तेलों की उपलब्धता को लेकर भी सरकार ने भरोसा जताया है। पाम तेल, सूरजमुखी तेल और सोयाबीन तेल के लिए प्रमुख उत्पादक देशों से आयात लगातार जारी है। इसके साथ ही घरेलू उत्पादन भी बाजार की मांग को पूरा करने में सहयोग कर रहा है। सरकार ने कहा कि वह बाजार में कीमतों और आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

चीनी की उपलब्धता को लेकर भी किसी तरह की चिंता नहीं जताई गई है। सरकार के अनुसार उत्पादन और मौजूदा स्टॉक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त हैं, जिससे बाजार में आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।

उर्वरकों के मोर्चे पर भी स्थिति संतोषजनक बताई गई है। उर्वरक विभाग के अनुसार आयात और घरेलू उत्पादन के संयुक्त प्रयासों से उर्वरकों की उपलब्धता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। जून और जुलाई में बड़ी मात्रा में यूरिया, डीएपी और एनपीके भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने वाले हैं, जिससे कृषि क्षेत्र की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी।

सरकार ने यह भी बताया कि घरेलू उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है। मई महीने में यूरिया और डीएपी का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रहा, जो कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि खाद्य और कृषि सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम लगातार उठाए जा रहे हैं।

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