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अर्श से फर्श पर।

अर्श से फर्श पर।

 
 
26 जनवरी को दिल्ली में गणतंत्र दिवस की परेड के मुख्य अतिथि मिस्र के राष्ट्रपति  से मिलने वालों की सूची में एक गैर-सरकारी नाम था गौतम अडानी। क्योंकि गौतम अडानी दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति थे और भारत के नंबर वन। परंतु वही गौतम अडानी 7 दिन के बाद इस स्थिति में है कि उनसे कोई मिलना नहीं चाह रहा है, नेता और अधिकारी उनकी परछाई से दूर भाग रहे हैं क्योंकि उन के औद्योगिक घराने को हिडेन बर्ग नाम की एक खुफिया कंपनी ने ग्रहण लगा दिया है। 7 दिन में कंपनी के विभिन्न शेयर 25 से लेकर 55% तक बाजार भाव से नीचे आ चुके हैं कंपनी ने अपना बहुचर्चित 20000 करोड़ का एफपीओ निरस्त कर दिया है। अमेरिकी शेयर बाजार से अंबानी की कई कंपनियों को अन लिस्ट कर दिया गया है गिरावट का आलम अभी थमता नहीं दिख रहा है लाखों लोग जो उम्मीद से अदानी समूह के शेयर खरीद रहे थे उनकी हालत खराब है अगले कुछ दिन में हालत नहीं कंट्रोल में आये तो कई लोगों के आत्महत्या करने के मामले सामने आ जाएंगे क्योंकि बाजार कई हजार करोड़ टूट चुका है।
अपनी रिपोर्ट में हिडेन बर्ग ने अदानी समूह की कंपनियों पर सीधा आरोप लगाया है कि कंपनियों की संपत्ति और लाभ को कई गुना ज्यादा बताकर बैंकों से ऋण लिया गया षड्यंत्र करके सरकारों से पैसे वसूले गए मारीशस के रास्ते कई समूह की शेल कंपनियों में अरबों खरबों रुपए लगाए गए।
ताजा हालात के बाद रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों से अदानी कंपनी को दिए गए ऋण का दौरा मांग लिया है इससे कई और नए खुलासे होंगे। संसद में पिछले 2 दिन से कामकाज ठप पड़ा है क्योंकि समूचा विपक्ष इस प्रकरण पर चर्चा पर अ ड़ा हुआ है जेपीसी की मांग की जा रही है।
अदानी समूह की तेजी से हुई प्रगति पर कईयों को संदेह था माना जा रहा था कि भाजपा सरकार का इस उद्योगपति पर वरद हस्त है। हमारे देश में ऐसी कोई रिपोर्ट इस समूह के खिलाफ आती तो उसे दबा दिया जाता क्योंकि सरकार तो अदानी समूह के साथ है वही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर भी इस समूह का लगभग कब्जा है कोई भी जांच एजेंसी खिलाफ जाकर नहीं बोल सकती थी लेकिन मामला अमेरिका का है यहां किसी भी तरह नहीं रोक पाया जा रहा है अडानी समूह पर हुए हमले को भारत पर हमला बताया जा रहा है लेकिन जानकारों का कहना है कि इस कंपनी के खुलासे के बाद भारत की अर्थव्यवस्था बच गई है अन्यथा सरकार पूरी तरह से अर्थव्यवस्था अडानी को गिरवी रख देती।

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