रबी फसलों का निरीक्षण कर कृषि उन्नत तकनीक की दी जानकारी
भोपालगढ़। रबी मौसम की फसलों मे बादलों का छाया रहना,हवा मे नमी का बढ़ना कीट-रोग पर निगरानी जरुरी है।रबी फसलों में सम्भवतःपाले से फसल बचाव के उपाय महत्वपूर्ण है।इसे लेकर कृषि-उद्यान विभाग ने उन्नत तकनीकी को किसानों में साझा किया। सहायक कृषि अधिकारी रफीक अहमद कुरैशी ने जीरा की फसल निरीक्षण के दौरान कहा कि जीरा फसल में दो बार निराई-गुड़ाई करने से भूमि में हवा,पानी का अनुपात बना रहने से फसल बढ़वार का फायदा मिलता है।इस फसल में सामान्यतःहोने वाले कीट-रोग के लक्षण एवं उपचार को लेकर विस्तृत चर्चा की साथ पाले से फसल बचाव के उपाय को लेकर भी उन्नत कृषि तकनीकी की जानकारी दी।इस मौके पर तेजपाल तंवर, कोजाराम, भंवरलाल,जगदीश,भीखाराम सहित उपस्थित थे।
उपनिदेशक उद्यान का कहना
नगदी सब्जी वाली फसलों मे भूमि के तापमान को बनाये रखने के लिए फसलों को टाट,पाँलिथिन अथवा भूसे से ढ़क देने से भी पाले का असर कम होता है।फसल मे हल्की सिचांई कर देने से भी भूमि का तापमान वृद्धि से पाले का कम होगा।
डा.जीवनराम भाकर
उपनिदेशक उद्यान जोधपुर
संयुक्त निदेशक कृषि का कहना
जब आसमान साफ हो,हवा न चल रही है और तापमान काफी कम हो जाये तब पाला पड़ने की सम्भावना बढ़ जाती है।शीतलहर व पाले से फसलों को नुकसान होने की सम्भावना रहती है।जिसमें पौधों की पत्तियों व फूल झुलसकर झड़ जाते है।फलियों-बालियों में दाने नही बनते है अथवा सिकुड़ जाते है।पाले से बेहतरीन उपाय फसल की वांच्छित अवस्था पर एक लीटर गंधक का तेजाब (सांद्र)को एक हजार लीटर पानी में घोल तैयार कर प्रति हेक्टर छिड़काव करने से कई दिनों तक पाले का असर सम्भावित फसल पर नही होगा।पाले का स्थाई समाधान के लिए खेतों के उत्तरी-पश्चिमी दिशा में मेड़ों पर ऊंचे घने वृक्ष लगाना चाहिये।
ब्रजकिशोर द्धिवेदी
संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार जोधपुर