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गीता प्रेस भगवान का स्वरूप है

गीता प्रेस भगवान का स्वरूप है

 
  रतनगढ़ ।  भाईजी हनुमानप्रसाद पोद्दार के नोहरे में गत साय संत प्रहलाद महाराज ने कहा कि गीता प्रेस भगवान का स्वरूप है। वह ईश्वर की बात कहती हैं। यह प्रेस नहीं होती तो, हम नहीं जानते भगवान का स्वरूप क्या है? इस प्रेस से ही हमें विस्तार से ज्ञात हुआ है कि ईश्वर क्या है ? गीता प्रेस में सब अपने अपने कर्तव्यों का धर्म पूर्वक पालन करते हैं। प्रेस का मूल उद्देश्य ईश्वर से संबंध कैसे हो यही है। महाराज ने बताया कि हम जिस भूमि पर बैठे हैं, यह कोई साधारण भूमि नहीं, बड़ी पावन भूमि है। यहां भाईजी जैसे महान महापुरुष हुए हैं। संत महापुरुष अविनाशी से जुड़ जाते हैं तो उनकी प्रत्येक चीज अविनाशी हो जाती है। संत महापुरुष बड़े ही विलक्षण होते हैं। उन्होंने मन,मति, चित्त और अहंकार पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि त्रिगुण आने पर ही अहंकार का नाश होता है। मानव जीवन में पतन व उत्थान में ज्यादा समय नहीं लगता है। महाराज ने उपस्थित भाईजी के परिकरों को भगवत नाम संकीर्तन कराया। इससे पूर्व महाराज ने भाईजी व राधा बाबा के चित्र पर पुष्प चढ़ाकर पूजा अर्चना की ।सत्संग आयोजन में किशनलाल पंसारी ,विष्णुदत्त चौधरी, सांवरमल माटोलिया, कृष्णकुमार सराफ, रामगोपाल मुरारका, कुलदीप व्यास, हरिशंकर मंगलहारा, ओम सारस्वत, अनूप जोशी सहित अनेकों धर्म श्रद्धालु जन उपस्थित थे।

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