भक्ति से ही प्रसन्न होते हैं भगवान - कृष्णानन्द महाराज
रतनगढ़ । सागर भक्त की गोगामेड़ी प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में व्यापीठ से कृष्णानन्द महाराज ने कहा की निष्काम भाव से की गई भक्ति से ही भगवान प्रसन्न होते हैं। भक्तों के चरित्र सुनाते हुये कहा कि ध्रुव जी ने बाल्यकाल में कठीन तप करके ही गजेन्द्र ने करुण पुकार कर के अजामिल ने नाम स्मरण कर भगवान को प्राप्त कर लिया था। महाराज ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुये कहा कि धरती पर जीवन के लालन पालन के लिए पर्यावरण प्रकृति का उपहार है। हमारा पर्यावरण धरती पर स्वस्थ जीवन को अस्तित्व में रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर्यावरण रक्षण के लिये सभी लोगों को अपने जीवनकाल में अधिकाधिक वृक्ष लगाने का संकल्प लेना होगा। कथा में पुर्व राजकुमार रिंणवा, अंबिकाप्रसाद हारित, जयकांत बींवाल, निलेश इंदौरिया, अशोक गौड़, महावीर प्रसाद, श्याम लाल भोभरिया, रामचंद्र चंपालाल भोड़ीवाल, महेंद्र हुड्डा, ओमप्रकाश नेहरा, गणेश हारित, सागरमल गासोरिया, नारायण सिंह, रामोतार पुजारी, बबिता शर्मा, गीता भोभरिया, मंजु स्वामी, निहारिका गौड़, पुष्पा देवी भारद्वाज आदि उपस्थित थे।