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गुरु नानक जयंती बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाई गई

गुरु नानक जयंती बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाई गई

केकड़ी। बंजारा मोहल्ला स्थित सिंधी मंदिर में सिखों के प्रथम आराध्य गुरु नानक देव जी महाराज की जन्म जयंती पुणे से आए सुरेश महाराज के सानिध्य में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ नाच–गाकर मनाई गई।
सिंधी भ्रात्री मंडल के मीडिया सहायक राम चन्द टहलानी ने बताया कि गुरु नानक जयंती की पूर्व संध्या पर सिंधी मंदिर में सुखमणि साहिब जी का पाठ रखा गया।
सिंधी मंदिर से आज सुबह 6:00 बजे गुरुनानक देव जी के जयघोष के साथ प्रभात फेरी निकाली गई जो केकड़ी के विभिन्न मार्गो से होती हुई वापस मंदिर पर आकर समाप्त हुई।
इस दौरान मंदिर में सुरेश महाराज ने गुरुग्रंथ साहिब जी की पावन वाणियों का वाचन करते हुए कहा कि तेरा कीतो जातो नाहीं, मैनू जोग कितोई। मुझमें निर्गुण न्यारे का गुण नाहीँ, सतगुरु सजन मिले तरस ता पाई, मेहर ता होई, नानक नाम मिले ता ज़िंदा होई। भावार्थ मैं नादान हूं मैं कुछ नहीं जानता आपने मुझे अपना बनाकर जीवन जीना सिखाया है मैं आपके वचनों पर चलकर और आपका संदेश जन-जन तक पहुंचा पाऊं। इस दौरान श्री सत्यनारायण जी की कथा के साथ पिछले सात दिनों से चल रहे अखंड पाठ साहिब जी को कणा प्रसाद का भोग लगाकर पाठ साहिब जी का समापन किया गया।
इस समारोह में सिंधी संरक्षक मंडल,सिंधी भ्रात्री मंडल,सिंधी महिला मंडल,सिंधी नवयुवक मंडल के मुखियाओं एवम सदस्यों द्वारा पाठ साहिब जी पर रुमाल चढ़ाकर समाज में,हर घर परिवार में,शहर में देश-विदेश में चैन अमन की कामना की गई।
इस अवसर पर समस्त समाज एवं धर्म प्रेमी श्रद्धालुओं के लिए अटूट लंगर की व्यवस्था की गई जिसे श्रद्धालुओं ने बड़े ही श्रद्धा के साथ चखा। अंत में पुणे से आए हुए सुरेश महाराज ने सभी को गुरु नानक जयंती की लख-लख बधाइयां एवं शुभकामनाएं दी।

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