उत्तर भारत में गर्मी ने दिखाया रौद्र रूप
उत्तर भारत सहित देश के अनेक राज्य इस समय भीषण गर्मी के साथ पानी और बिजली की
समस्या से जूझ रहे है। सूर्यदेव ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। मार्च और अप्रैल में बारिश के
बाद मई में आसमान में आग उगलता सूरज और तवे सी तपती धरती ने मैदानी क्षेत्र को झुलसा
दिया है। गर्मी के रौद्र रूप धारण कर लेने से समूचा उत्तर और मध्य भारत त्राहि त्राहि कर रहा
है। अल सुबह से रात तक राहत नहीं मिलने से मानव जीवन व्याकुल हो रहा है। सवेरे नलों में
छत पर रखी टंकी से गर्म पानी आने से शौच के साथ नहाने में भारी दिक्कत का सामना करना
पड़ रहा है। विद्वानों के अनुसार, अभी तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है क्योंकि जल्द ही
नौतपा शुरू होने वाला है। सूर्य 25 मई से लेकर 8 जून तक 23 अंश 40 कला तक रहेगा। इस
अवधि को नौतपा कहा जाता है। नौतपा में सूर्य धरती के करीब रहता है और भारत में सूर्य की
किरणें सीधे लंबवत पड़ती है, जिससे तापमान में वृद्धि होती है और लोगों को भयंकर गर्मी का
सामना करना पड़ेगा। इसी बीच कोयले की कमी के कारण राजस्थान सहित उत्तर प्रदेश,
उत्तराखंड, महाराष्ट्र, झारखंड समेत देश के अनेक राज्यों में बिजली संकट उत्पन्न हो गया है।
अनेक राज्यों में बिजली कटौती शुरू हो गई है। नल सूख गए है और पेयजल के लिए लोग
परेशान हो गए है। प्रदूषण ने इस दौरान कोढ़ में खाज का काम किया है। पारा लगातार उपर
चढ़ता जा रहा है। देश के अनेक शहरों में अधिकतम तापमान 46 डिग्री के पार पहुंच गया। देश
की राजधानी दिल्ली समेत हरियाणा राजस्थान, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात
में लू चलने लगी है और इन राज्यों में पारा 40 से 46 डिग्री से तक जा पहुंचा है। इस समय
गर्मी का रौद्र रूप बढ़ने के कारण आमजन पर भी उसका असर साफ दिखाई दे रहा है। गर्मी के
साथ-साथ लू के चलने के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है। भीषण गर्मी व लू के थपेड़ों ने
जनजीवन को बेहाल कर दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि दोपहर के समय लोगों का घर से
बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। गर्म हवा झुलसा रही है। गर्मी भी चरम पर पहुंच गई है।
इस दौरान प्रदूषण ने कोढ़ में खाज का काम किया है। विशेषकर महानगरों में बढ़ता प्रदूषण
गंभीर समस्या बना हुआ है। क्योंकि बढ़ता प्रदूषण गर्मी में इजाफा कर रहा है। जिसके चलते
लोगों को परेशानी हो रही है। अगर प्रदूषण ऐसे ही बढ़ता रहा तो आने वाले समय में सांस लेना
भी दुभर हो जाएगा।
मौसम विभाग के अनुसार बलूचिस्तान और थार मरुस्थल से गर्म हवाएं चल रही हैं। वातावरण में नमी
काफी कम है। इन सभी परिस्थितियों के कारण ही यह हालात बने हैं। मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी
करते हुए कहा कि पश्चिम और उत्तर पश्चिम भारत में चल रही हीटवेव अब लोगों को काफी परेशान करेगी
इसलिए सबको काफी सचेत रहने की जरूरत है। जब तापमान बहुत अधिक होता है। जब कोई व्यक्ति गर्म
हवा और धूप में देर तक रहता है, उसका चेहरा और सिर देर तक धूप और गर्म हवा के संपर्क में आता है, तो लू
लग जाती है। इससे व्यक्ति के शरीर का तापमान भी बहुत अधिक बढ़ जाता है। जब भी घर से बाहर निकलें
अपना सिर और शरीर ढंक कर निकलें।
गर्मी का मौसम सितंबर तक रहता है। यह साल का सबसे गर्म मौसम होता है, क्योंकि तापमान अपने उच्च
शिखर पर पहुँचता है। इस ऋतु के दौरान, दिन लम्बे और गर्म होते हैं, वहीं रातें छोटी है। दिन के बीच में, सूर्य
की किरणें बहुत गर्म होती है। पूरे दिनभर गर्म हवाएं चलती रहती है, जो चारों तरफ के वातावरण को रूखा
और शुष्क बनाती है। कुएं, और तालाबें सूख जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग पानी की कमी, उच्च
तापमान, सूखे आदि बहुत सी परेशानियों से बिजली और अन्य आरामदायक संसाधनों की कमी के कारण
जूझते हैं। ग्रीष्म ऋतु साल का सबसे गर्म मौसम होता है, जो पूरे दिन भर में बाहर जाने को लगभग असंभव
बनाता है। लोग आमतौर पर, बाजार देर शाम या रात में जाते हैं। बहुत से लोग गर्मियों में सुबह को इसके
ठंडे प्रभाव के कारण टहलने का आनंद लेते हैं। धूल से भरी हुई, शुष्क और गर्म हवा पूरे दिनभर चलती रहती
है। कभी-कभी लोग अधिक गरमी के कारण हीट-स्ट्रोक, डीहाइड्रेशन (पानी की कमी), डायरिया, हैजा, और
अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से प्रभावित होते हैं।
-बाल मुकुन्द ओझा