अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने में सहयोग करें प्रशासन की समुदाय से अपील
आगामी 22 अप्रैल को अक्षयतृतीया का पर्व पड़ रहा है। उक्त दिवस को राजस्थान राज्य बड़े पैमाने पर बाल विवाहों का गवाह रहा है। राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग, गृह विभाग और राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से इस बार बाल विवाह रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी संबंध में अतिरिक्त जिला कलेक्टर सुदर्शन तोमर की अध्यक्षता में बाल विवाह रोकथाम हेतु जिला स्तरीय मीटिंग का आयोजन किया गया। मीटिंग में अतिरिक्त जिला कलेक्टर द्वारा बताया गया कि जिला स्तर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं तालुका विधिक सेवा समितियों के साथ प्रशासन और पुलिस की सहभागिता में जिला स्तरीय और उपखण्ड स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। जिला स्तर पर और ब्लॉक स्तर पर 24 घंटे कंट्रोल रूम सक्रिय रहेगा। ग्रामीण स्तर पर कोर ग्रुप्स सक्रिय रहेंगे। विद्यालय स्तर पर भी सतर्कता समितियों का गठन किया जाएगा।
इसके साथ ही चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस हेल्पलाइन 100 भी सक्रियता से सुचारू रहेंगी। बाल विवाह करने वाले बालिग पुरुष समेत पंडित/मौलवी, मैरिज होम, कैटरिंग, हलवाई, घराती-बाराती सभी दो वर्ष तक के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने से दंडनीय होते हैं। अक्षय तृतीया पर उपखण्डाधिकारियो के साथ साथ जिला मजिस्ट्रेट भी बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के दायित्व का निर्वहन करेंगे। सभी बाल विकास परियोजना अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर जागरूकता पैदा करने हेतु गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। उपखण्डाधिकारियो को ब्लॉक स्तर पर इसी तरह की समन्वय मीटिंग के आदेश दिए गए हैं।
बैठक में उपखण्डाधिकारी, बीडीओ, सहायक निदेशक डीसीपीयू विश्व देव पांडेय ,बाल कल्याण समिति सदस्य ब्रजेश मुखरिया, एडीपीसी समसा मुकेश गर्ग, सभी ब्लॉक के सीडीपीओ, डिप्टी सीएमएचओ चेतराम मीना, भंवरसिंह एसआई, पीओ पवन तोमर, शहर काजी मतीन खान गौरी, महंत हनुमानदास, दिनेश शास्त्री, पीयूष शर्मा, महंत रामदास, प्रिंटिंग प्रेस वाले, मैरिज होम, कैटरिंग, हलवाई, टेंट वाले, चाइल्ड लाइन से सरनाम सिंह, जन साहस से नरेंद्र सिंह, राजेश्वरी आदि उपस्थित रहे।