महाराणा प्रताप की जयंती पर बच्चों को सुनाई वीर गाथाएँ
जयपुर ।सुरतन प्रौद्योगिकी एवं जन कल्याण संस्थान अध्यक्ष एडवोकेट विकास सोमानी की ओर सेंं स्वामी विवेकानंद बालिका सीनियर सेकेंडरी बापूनगर जयपुर में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर सोमानी ने महाराणा प्रताप पर प्रकाश डालते हुए बताया की महाराणा प्रताप भारत के महान शूरवीर सपूतों में एक थे। वीरों के वीर महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया जिनके शौर्यए त्याग और बलिदान की गाथाएं आज भी देश में चारों ओर गूंजती हैं। महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को राजपूत राज परिवार में हुआ था। पिता उदय सिंह मेवाड़ा वंश के शासक थे। इस अवसर डॉ. मनीषा सिंह, शिमला कुमावत, विनिता अग्रवाल, एडवोकेट दिनेश कुमावत, जगदीश कुमार, दिनेश जैन आदि लोग उपस्थि थे।
उन्होने ने बच्चों को महाराणा प्रताप की वीर गाथाएँ सुनाते हुए बताया की महाराणा प्रताप मुगल सम्राट अकबर से नहीं हारे। उसे एवं उसके सेनापतियो को धुल चटाई । हल्दीघाटी के युद्ध में प्रताप जीते। महाराणा प्रताप के विरुद्ध हल्दीघाटी में पराजित होने के बाद स्वयं अकबर ने जून से दिसम्बर 1576 तक तीन बार विशाल सेना के साथ महाराणा पर आक्रमण किएए परंतु महाराणा को खोज नहीं पाएए बल्कि महाराणा के जाल में फँसकर पानी भोजन के अभाव में सेना का विनाश करवा बैठे। थक हारकर अकबर बांसवाड़ा होकर मालवा चला गया। पूरे सात माह मेवाड़ में रहने के बाद भी हाथ मलता अरब चला गया। शाहबाज खान के नेतृत्व में महाराणा के विरुद्ध तीन बार सेना भेजी गई परन्तु असफल रहा। उसके बाद अब्दुल रहीम खान.खाना के नेतृत्व में महाराणा के विरुद्ध सेना भिजवाई गई और पीट.पीटाकर लौट गया। 9 वर्ष तक निरन्तर अकबर पूरी शक्ति से महाराणा के विरुद्ध आक्रमण करता रहा। नुकसान उठाता रहा अन्त में थक हार कर उसने मेवाड़ की और देखना ही छोड़ दिया।