देश की तकदीर बदल सकती है बागवानी
जयपुर। श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विष्वविद्यालय, जोबनेर के कुलपति डा. बलराज सिंह ने कहा कि जनसंख्या के साथ भूमि जोत, पानी, बिजली और कृषि क्षेत्र पर दबाव बढ़ रहा है। भूमि व पानी को बढ़ाना संभव नहीं है। लेकिन 130 मिलियन बंजर भूमि को बागवानी के अन्तर्गत लाकर देष की तकदीर बदली जा सकती है। इसके अलावा ष्शोध, मूल्यसवंर्घन, प्रिंन्सीजन फार्मिंग टिष्यू कल्चर, गा्रफ्टिगं, एआई तकनीक की ओर भी ध्यान देने की जरूरत है। कुलपति सिंह रारी, दुर्गापुरा में आयोजित सोसायटी ऑफ हार्टिकल्चर एवं रिसर्च डवलपमेंट ( एस.एच.आर.डी) उत्तर प्रदेष के 10वें स्थापना दिवस समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होने कहा कि वर्ष 2050 तक जनसंख्या के लिहाज से हमें 450 मिलियन मीट्रिक टन सब्जी व 300 मिलियन मीट्रिक टन फलों की आवष्यकता होगी। लेकिन वर्तमान में खद्यान्न का उत्पादन 316 मिलियन टन और बागवानी फसलों का उत्पादन 342 मिलियन मीट्रिक टन के करीब है।
जिसे हमे शोध और नई तकनीकियों के जरिए बढ़ाने की जरूरत है। उन्होने कहा कि राजस्थान में बागवानी की असीम संभावनाऐं है। जिस तरह अनार की बागवानी में पष्चिमी जिलों के किसानों की तकदीर व तस्वीर बदलने का काम किया है इसी तरह प्रदेष में कलस्टर एप्रोज के आधार पर पुष्प, मसाला, पोस्ट हार्वेस्ट, शहद उत्पादन के क्षेत्र में आरे बढऩे की जरूरत है। उन्होने कहा कि जीरा निर्यात से सालाना 4200 करोड़ रूपए की विदेषी मुद्रा प्राप्त हो रही है। 2050 तक निर्यात का आंकड़ा 50 हजार करोड़ तक ले जाने की जरूरत है।इसके लिए हमें जीरा मूल्यसवंर्धन पर ध्यान देना होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नाबार्ड जयपुर के मुख्य महा प्रबंधक श्री राजीव सिवाच ने भी सम्बोधित किया। उन्होने कहा कि पिछले कुछ सालों में देष में बागवानी के क्षेत्र में अच्छा कार्य हुआ है। राजस्थान में सूक्ष्म सिचाई ओर वर्षा जल संग्रहण को बढ़ावा देकर बागवानी फसलों का दायरा बढाया जा सकता है। वर्तमान में प्रदेष में 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी फसलों का उत्पादन हो रहा है।
इससे पूर्व समारोह में एस.एच.आर.डी. के उपाध्यक्ष डा. बी.एस. तोमर में संस्था की प्रगति पर प्रकाष डाला। कार्यक्रम में डा. सोमदत्त, डा. जे.के. रजंन एवं रारी के निदेषक डा. ए.एस. बलोदा ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम की शूरूआत में महाराणा प्रताप की फोटो पर पर सभी अतिथियों द्वारा पुष्पांजली अर्पित की गई। बागवानी विषेषज्ञों का सम्मान: इस मौके पर संस्था के द्वारा प्रदेष के बागवानी विषेषज्ञो एवं प्रगतिषील किसानों और मिडियाकर्मियों को श्रीफल और प्रषस्तीपत्र प्रदान करके सम्मानित किया गया।