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राष्ट्र निर्माण में महिलाओं का अहम योगदान:- रामचंद्र तुलसीयान

राष्ट्र निर्माण में महिलाओं का अहम योगदान:- रामचंद्र तुलसीयान

 
 झुंझुंनू । अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इस पावन अवसर पर तुलसयान जी लड़कियों की एक स्कूल अपने संबोधन में कहा कि आजादी के बाद राष्ट्र निर्माण में महिलाओं का अहम योगदान रहा है, महिलाओं ने हमेशा अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और सभी क्षेत्रों में सफलता हासिल की है , मेरा तो यही कहना है, जीवन कि विभिन्न क्षेत्रों की प्रगतिशील महिलाओं का अभिनंदन  किया जाना चाहिए जिन्होंने न केवल खुद के बल्कि संपूर्ण समाज के सर्वांगीण विकास के लिए अथक परिश्रम करके निस्वार्थ योगदान दिया, फिर चाहे वह ग्रहणी हो या कामकाजी पेशेवर, आधुनिक भारत में व्यक्तिगत और वित्तीय आत्मनिर्भरता चाहने वाली युवा महिलाओं के लिए परम प्रेरणा है, 21वीं सदी में आज यह देखकर अत्यधिक सुखानुभूति हो रही है कि भारतीय अर्थव्यवस्था नई ऊंचाइयों को छू रही है ।हमारी अर्थव्यवस्था 2014 में दसवें स्थान पर थी   जो अब पांचवें स्थान पर पहुंच गई है, हमारे पास स्वर्णिम अवसर है कि हम यहां से आगे बढ़कर दुनिया के सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बने ,इस काम में महिलाओं का विशेष योगदान हो रहा है।
भारत आज वैसा नहीं है जैसा कल था, और कल का भारत वैसा नहीं होगा जैसा आज है ,मैंने देखा है हमारे देश में महिलाओं ने हर मोर्चे पर जिस तरह का मुकाम हासिल किया है उतसाहबरधक और प्रेरणादायक है ,फिर चाहे व्यवसाय हो, राजनीति हो ,कला रक्षा के क्षेत्र हो ,सभी जगह महिलाओं का वर्चस्व देखा जा सकता है हमारी संस्कृति में महिलाएं हमेशा सम्माननीय रही है लेकिन उन्हें हमेशा सामाजिक मानदंडों पर परीक्षण के दायरे में रखा जाता रहा है ,मैं समाज की हर वर्ग की मानसिकता में बदलाव देख रहा हूं जो बेहद महत्वपूर्ण है।
महिलाओं की विश्व में राजनीति के क्षेत्र में भागीदारी केवल 24% है, महिला सशक्तिकरण और महिला साक्षरता के लिए अनेक प्रयासों के बावजूद भी स्थिति अभी सामान्य नहीं है, महिलाओं के प्रति लगातार बढ़ रहे अपराध बर्बरता में घरेलू हिंसा की घटनाओं में भी वर्दी अत्यंत निंदनीय है, जो समाज मैं स्त्रियों के प्रति दर्शाती है समाज में स्त्रियों के प्रति अपनी सोच में परिवर्तन करना होगा,  खासतौर पर युवा पीढ़ी को,हमें पुरुष प्रधानता के विचार को छोड़कर नारी के प्रति समानता कि भावना को बढ़ावा देना चाहिए।
 
 
 

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