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सियासी जंग के बीच जायके में लगा महंगाई का तड़का

सियासी जंग के बीच जायके में लगा महंगाई का तड़का

देश के राजनीतिक दल और नेता इस समय सियासी जंग में व्यस्त है वहीं महंगाई ने एक बार फिर तांडव
मचाना शुरू कर दिया है। पेट्रोल डीज़ल के भाव कम होने का नाम नहीं ले रहे है। बाजार में तेल के दाम फिर
बढ़ने की चर्चा है। बेमौसम बारिश ने सब्जियों के साथ मसालों और दालों के बाजार में आग लगा दी है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक थोक के मुकाबले फुटकर में दाल, मसाले और सूखे मेवों की कीमतों में दोगुना
का अंतर है। इसका सबसे ज्यादा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है। व्यापारी कहते हैं कि कुछ सामान की
कीमतें फुटकर में थोक के मुकाबले दोगुनी हो जाती है। महंगी दालों और मसालों ने रसोई का बजट बिगाड़
दिया है। लाल मिर्च, जीरा और लोंग आदि ने लोगों को दिन में तारे दिखा दिए है। खाद्य वस्तुओं के दामों में
तेजी का रूख बना हुआ है। इससे कई वस्तुओं के दाम तो रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। ऐसे में महंगाई ने
आम आदमी की परेशानी और बढा दी है।
दाल कभी आम लोगों का सहारा थी। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार दाल-रोटी खाकर अपना गुजारा कर
लेता था, मगर अब ऐसा नहीं है। महंगाई की मार दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। सब्जियों के भाव आसमान
छू रहे हैं। यही हाल प्याज का है। खाद्य तेलों के भी भाव चढ़े हुए हैं। अरहर, मूंग, मसूर और उड़द की दालों
के दाम एक सौ से डेढ़ सौ रूपये किलो पहुँच गए है। अरहर दाल की कीमत एक माह में 25 प्रतिशत तक बढ़
गयी। दैनिक जीवन में हम तरह की दालों का सेवन करते हैं। दाल प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत माना जाता है।
महंगाई के पंख लगने के बाद दालें लोगों की पहुंच से दूर हो गई हैं। हालत यह है कि दालों को खाना अब
लोगों के बस की बात नहीं रही। हर दाल के दाम आसमान छू रहे हैं। दालें रसोई से छिटक चुकी है और गरीब
की थाली से भी दूर हो गयी है। दाल न सिर्फ हमारे शरीर में जरूरी विटामिन और मिनरल की आपूर्ति करती
है बल्कि हमें तंदरुस्त बनाए रखने में भी मदद कर सकती हैं। खुदरा विक्रेता रोजमर्रा की चीजें काफी महंगे
भावों में बेच रहे है तो दालें भी हमारे से दूर होती जा रही है। लगता है सरकार का इन पर कोई अंकुश नहीं है।
दालें महँगी होने के साथ मिलावटी भी देखी जा रही है। हमारे जीवन में मसालों और दालों का बहुत महत्त्व है।
अमूमन प्रत्येक घर में रोजाना दाल बनती है। जिसे बच्चे से बुजुर्ग तक बड़े चाव से सेवन करते है। लंच हो या
फिर रात का डिनर। दाल के बिना खाना कुछ अधूरा सा लगता है और दाल में भी मूंग, उड़द, अरहर और
मसूर की दाल को सबसे पौष्टिक माना जाता है। दाल के अनेक फायदे हैं। दालों के भाव निरंतर बढ़ते ही जा
रहे है। महंगाई सरकार के काबू में नहीं है। सब्जियों के साथ दालें भी थाली से दूर होती जा रही है।

दाल को स्वास्थ्यवर्धक माना गया है। चिकित्सकों के अनुसार छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और विभिन्न
बीमारियों के दौरान मरीजों को दाल का पानी पीने की सलाह दी जाती है। दाल महँगी तो हो ही रही है मगर
मिलावट का तड़का भी देखा जा सकता है। अगर आप दालों की चमक दमक देखकर खरीद करते हैं तो
सावधान हो जाइए। ये दाल आपकी सेहत को खराब नहीं बहुत खराब कर सकती हैं। इसमें चमक के लिए
मिनरल ऑयल की मिलावट की जाती है। खाद्य विभाग की जांच में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। दाल को
पौष्टिक आहार माना जाता है, लेकिन जब ये पौष्टिक आहार ही आपकी सेहत बिगाड़ने लगे तो सोचिए क्या
होगा।

-बाल मुकुन्द ओझा

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