समद राही के बाल कविता संग्रह ‘परीलोक की रानी‘ का लोकार्पण
बाल साहित्य बच्चों के चरित्र निर्माण में सहायक : राही
बाल मन में संस्कारों का बीजारोपण करने में कविताओं की महती भूमिका : आफरीदी
सोजत। बच्चों में अच्छे संस्कारों के बीजारोपण के लिए उन्हें प्रारंभ से ही सद् साहित्य पढ़ने के अवसर दिए जाएं। कहानी, कविता, संस्मरण और अन्य साहित्यिक विधाएं उन्हें नैतिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध करने में महती भूमिका निभाती हैं। उक्त उद्गार प्रतिष्ठित कवि-व्यंग्यकार फारूक आफरीदी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी जयपुर के सभागार में ख्यातनाम शायर और बाल साहित्य लेखक अब्दुल समद राही के बाल कविता संग्रह ‘परीलोक की रानी‘ का लोकार्पण करते हुए व्यक्त किए।
अकादमी के अध्यक्ष इकराम राजस्थानी ने कहा कि अब्दुल समद राही देश के जाने-माने बाल साहित्यकार हैं जिन्होंने हिंदी, राजस्थानी और उर्दू में विविध विधाओं में साहित्य सृजन किया है और बाल मनोविज्ञान की उन्हें गहरी समझ और पकड़ है। संग्रह में सम्मिलित 22 कविताएं बच्चों का हौंसला बढ़ाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। पुस्तक लेखक अब्दुल समद राही ने कहा कि बाल साहित्य बच्चों के चरित्र निर्माण में सहायक होता है अभिभावक को चाहिए कि वो अपने बच्चों को पढ़ने के लिए बाल साहित्य उपलब्ध कराएं ताकि मनोरंजन के साथ साथ उनका चरित्र निर्माण हो सके।
नेहरू बाल साहित्य अकादमी के सदस्य, गीतकार और सतरंगा बचपन के संपादक सत्यदेव संवितेंद्र, अकादमी सचिव डॉ. राजेंद्र मोहन शर्मा, उपाध्यक्ष बुलाकी शर्मा उपन्यासकार, ओमप्रकाश भाटिया और व्यंग्यकार प्रभात गोस्वामी, बाल साहित्यकार भगवती प्रसाद गौतम ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अब्दुल समद राही की कविताओं में लय है जो बच्चों के हृदय पर सीधा असर करती है। यह रचनाएं सामाजिक सद्भाव बढ़ाने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। कैशियर महेश चंद्र गुप्ता ने सभी का आभार व्यक्त किया।