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ट्रंप के लिए बढ़ी मुश्किलें, मध्यावधि चुनाव से पहले सर्वे में डेमोक्रेट्स आगे

ट्रंप के लिए बढ़ी मुश्किलें, मध्यावधि चुनाव से पहले सर्वे में डेमोक्रेट्स आगे

वाशिंगटन। अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से पहले सामने आए सर्वेक्षण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए मुश्किल संकेत दे रहे हैं। मतदान में अब करीब एक सप्ताह बचा है और कई चुनावी अनुमानों में डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत मिलने की संभावना जताई गई है। वहीं, सीनेट में किस पार्टी को बढ़त मिलेगी, इसे लेकर स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

चुनाव का परिणाम ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के अगले दो वर्षों की राजनीतिक दिशा तय कर सकता है। यदि डेमोक्रेट्स कांग्रेस के किसी एक सदन या दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं, तो वे राष्ट्रपति की नीतियों और फैसलों को चुनौती देने की स्थिति में आ जाएंगे। इससे प्रशासन और कांग्रेस के बीच टकराव बढ़ सकता है। ऐसे हालात में कानूनी विवाद और राजनीतिक गतिरोध की आशंका भी रहेगी।

ट्रंप ने खुद इन चुनावों को अपने प्रशासन के शुरुआती 20 महीनों के कामकाज पर जनमत संग्रह बताया है। उन्होंने समर्थकों से अपील की है कि वे इस तरह मतदान करें, जैसे राष्ट्रपति पद के लिए खुद ट्रंप चुनाव लड़ रहे हों। हालांकि, उनकी घटती लोकप्रियता के बीच रिपब्लिकन पार्टी के कुछ उम्मीदवार अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने और विवादित नीतियों से दूरी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

न्यू हैम्पशायर से रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवार जॉन सुनुनु ने अपने प्रचार विज्ञापन में कहा कि यदि राष्ट्रपति की नीतियां उनके राज्य के हितों के खिलाफ होंगी, तो वे उनका विरोध करेंगे। उन्होंने ईरान संघर्ष और कनाडा के साथ व्यापार विवाद का भी जिक्र किया। यह संकेत देता है कि चुनाव से पहले पार्टी के भीतर भी ट्रंप की नीतियों को लेकर असहजता मौजूद है।

महंगाई और ईंधन की कीमतें बनीं बड़ी चुनौती

सर्वेक्षणों में मतदाताओं की नाराजगी का प्रमुख कारण आर्थिक स्थिति बताई जा रही है। रियलक्लियर पॉलिटिक्स के अनुसार, संभावित मतदाताओं में 38.2 प्रतिशत लोग ट्रंप के कामकाज से संतुष्ट हैं, जबकि 60.2 प्रतिशत ने असंतोष जताया है। सर्वे में 57 प्रतिशत लोगों का मानना है कि ट्रंप की नीतियों के कारण उनकी आर्थिक स्थिति पहले से खराब हुई है।

महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने इस असंतोष को और बढ़ाया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, महंगाई दर अगस्त के 3.4 प्रतिशत से बढ़कर पिछले महीने 3.7 प्रतिशत हो गई। ईंधन की महंगी कीमतों का असर परिवहन से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं तक दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही आयातित सामान पर लगाए गए शुल्क यानी टैरिफ भी उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव डाल रहे हैं।

यह स्थिति ट्रंप के 2024 के चुनावी वादों के विपरीत दिखाई देती है। उस समय उन्होंने पेट्रोल की कीमत घटाकर दो डॉलर प्रति गैलन करने का दावा किया था। इसके उलट, दिए गए आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल की औसत कीमत 4.28 डॉलर प्रति गैलन और डीजल की कीमत 6.28 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है। ऐसे में आर्थिक मुद्दे रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए चुनावी चुनौती बन सकते हैं।

हाउस में डेमोक्रेट्स की बढ़त के संकेत

प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर इस चुनाव में मुकाबला है। रियलक्लियर पॉलिटिक्स के अनुमान में डेमोक्रेट्स को 227 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि 25 सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी माना गया है। कुक पॉलिटिकल रिपोर्ट ने डेमोक्रेट्स के लिए 220 सीटों का अनुमान लगाया है और 17 सीटों को अनिश्चित श्रेणी में रखा है।

कुक पॉलिटिकल रिपोर्ट की हाउस चुनाव संपादक एरिन कोवे के मुताबिक, प्रतिनिधि सभा पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए रिपब्लिकन पार्टी के पास अब बहुत सीमित संभावनाएं रह गई हैं। सीबीएस न्यूज के अनुमान में डेमोक्रेट्स को 229 और रिपब्लिकन्स को 206 सीटें मिलने की संभावना बताई गई है। हालांकि, नेटवर्क ने यह भी माना है कि रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत बचाने की गुंजाइश पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

विश्लेषकों के मुताबिक, अभी तक डेमोक्रेट्स के पक्ष में किसी बड़ी चुनावी लहर के स्पष्ट संकेत नहीं हैं। अनिर्णीत मतदाताओं का झुकाव नतीजों को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि अंतिम परिणाम को लेकर पूरी तरह निश्चित दावा करना जल्दबाजी होगी।

सीनेट की तस्वीर अब भी धुंधली

सीनेट में मुकाबला हाउस की तुलना में अधिक अनिश्चित नजर आ रहा है। इस बार 100 सदस्यीय सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। सीनेटरों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है और हर दो साल में लगभग एक-तिहाई सीटों पर मतदान कराया जाता है।

सीबीएस न्यूज के आकलन के अनुसार, इस बार चुनाव में शामिल नहीं होने वाली सीटों को जोड़कर डेमोक्रेट्स के पास 46 और रिपब्लिकन्स के पास 44 सीटें हैं। शेष सीटों के नतीजे यह तय करने में अहम होंगे कि सीनेट में किस पार्टी को बहुमत मिलता है।

इस बीच ट्रंप रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में अपनी रैलियां तेज कर रहे हैं। वे खास तौर पर उन राज्यों में प्रचार कर रहे हैं, जहां 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें जीत मिली थी। इन सभाओं को वे 'ट्रंपापालूजा' कह रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि उनके समर्थन से कमजोर स्थिति वाले उम्मीदवार भी जीत की ओर बढ़ रहे हैं।

अलास्का में सीनेट चुनाव को लेकर ट्रंप प्रशासन के न्याय विभाग की कानूनी कार्रवाई भी चर्चा में है। विभाग ने चुनाव परिणामों की आधिकारिक घोषणा रोकने की मांग से जुड़ा कदम उठाया है। विवाद की वजह बैलेट पेपर पर डैन एस. सुलिवन के नाम के साथ डैनियल जे. सुलिवन नाम के एक अन्य उम्मीदवार की मौजूदगी बताई गई है, जिससे मतदाताओं में भ्रम की आशंका जताई गई।

मतदान प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। सोमवार तक करीब तीन करोड़ अमेरिकी नागरिक पोस्टल बैलेट या मतदान केंद्रों के जरिए अपना वोट डाल चुके थे। देश में लगभग 21.7 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। हालांकि, मध्यावधि चुनावों में आमतौर पर राष्ट्रपति चुनाव की तुलना में मतदान कम होता है। वर्ष 2022 में मतदान प्रतिशत 46.2 और 2018 में 50 प्रतिशत दर्ज किया गया था।

अब सबकी निगाहें अंतिम मतदान और नतीजों पर हैं। यदि डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर लेते हैं, तो यह अमेरिकी राजनीति के उस पुराने रुझान के अनुरूप होगा जिसमें राष्ट्रपति की पार्टी को मध्यावधि चुनावों में नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन बहुमत का अंतर और सीनेट का नियंत्रण यह तय करेगा कि ट्रंप के लिए आगे का राजनीतिक रास्ता कितना कठिन होगा।

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