इंडिया गठबंधन : अपनी अपनी डफली अपना अपना राग
अपनी अपनी डफली अपना अपना राग एक चर्चित मुहावरा है जिसका अर्थ है– भिन्न-भिन्न मत होना
यानि जब एक समूह विशेष में शामिल लोग किसी एक बात पर सहमत न होकर अपने-अपने तरीके से कार्य
करते हैं। यह मुहावरा भाजपा को सत्ताच्युत करने के लिए बने सियासी गठबंधन इंडिया पर सटीक बैठता
है। तृणमूल कांग्रेस ने इसी बीच बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर इंडिया गठबंधन में बिखराव की
शुरुआत कर दी। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कह दिया है बंगाल में किसी से समझौता नहीं होगा। बंगाल
के वामपंथी दल पहले से ही ममता से खार खाये बैठे है और रही सही कसर कांग्रेस ने पूरी कर दी। ममता
और बंगाल कांग्रेस के नेताओं के एक दूसरे पर आरोपों प्रत्यारोपों के बीच ममता के अकेले चलो के बयान ने
इंडिया गठबंधन को बनने से पहले ही तोड़ दिया है। बताया जाता है ममता कांग्रेस को दो सीटों से ज्यादा
देना नहीं चाहती थी जिसे बंगाल कांग्रेस नेता स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। वहीं आम आदमी पार्टी ने भी
पंजाब की सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले
से ही कांग्रेस से नाराज चल रहे है। महाराष्ट्र में शिवसेना उद्धव गुट के रिश्ते भी कांग्रेस से सहीं नहीं चल रहे
है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इंडिया गठबंधन की पार्टियों में अब तक सीटों का बंटवारा नहीं होने से आपसी
मनमुटाव बढ़ने लगा है। राहुल गाँधी के न्याय यात्रा पर होने से घटक दलों की नाराजगी सामने आ रही है।
देश में आगामी लोकसभा चुनाव की घोषणा शीघ्र होने जा रही है। चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों ने
अपनी अपनी रणनीति बनाकर तैयारियां शुरू करदी है। एक मोर्चा या गठबंधन सत्तारूढ़ भाजपा नीत
एनडीए का है तो दूसरा कांग्रेस की अगुवाई वाला इंडिया गठबंधन का है। देश के अधिकांश राज्यों में एनडीए
और इंडिया गठबंधनों के बीच सीधे मुकाबले के आसार है। इनमें 26 पार्टियां इंडिया और 38 पार्टियों ने
एनडीए के झड़े के नीचे आने का फैसला किया है। एक दर्ज़न से अधिक ऐसी पार्टिया भी है जो दोनों के साथ
नहीं है। इसी के साथ चुनावी बिसात बिछने लगी है और सियासी दलों में एक दूसरे के खिलाफ तीखे आरोप
प्रत्यारोप शुरू हो गए है। इसी दौरान भाजपा ने पहले अयोध्या में राम मंदिर और फिर बिहार में पूर्व
मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को भारतं रत्न का एलान कर विपक्षी पार्टियों से जातीय मुद्दा छीन लिया। इसे
मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक बताया जा रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री ने इसका स्वागत करते हुए इसारे
इसारे में परिवारवाद पर हमला बोला। नीतीश को लेकर मीडिया में कई प्रकार की अफवाहें फैल रही है। कुछ
लोगों का कहना है नीतीश कभी भी पाला बदल कर एक बार फिर एनडीए में शामिल हो सकते है।
इंडिया गठबंधन आगामी लोकसभा चुनाव में मुख्य रूप से पांच राज्यों में सीटों के बंटवारे को लेकर
चक्करघिन्नी हो रहा है। ये राज्य है यूपी, प बंगाल, केरल, दिल्ली और पंजाब। इन पांच राज्यों में लोकसभा
की करीब 175 सीटें है। कांग्रेस को प. बंगाल, केरल, यूपी, दिल्ली और पंजाब जैसे प्रदेशों में अपने ही घटक
दलों के साथियों से टकराना होगा जिसका कोई सर्वमान्य हल निकालना बहुत मुश्किल है। यूपी में इंडि
गठबंधन के घटकों के सामने सीटों का बंटवारा बड़ा चुनौतीपूर्ण है। यहां समाजवादी पार्टी का बड़ा जनाधार
है। कांग्रेस को इस बड़े राज्य में 15 - 20 सीटें चाहिए मगर सपा चार पांच सीटों से ज्यादा देने को तैयार नहीं
है। सपा मुखिया अखिलेश यादव कांग्रेस को चालू पार्टी कह चुके है।
बंगाल में स्थिति यूपी से भी ज्यादा ख़राब है। बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें है। इनमें 2019 के चुनाव में
टीएमसी को 22, भाजपा को 18 और कांग्रेस को मात्र दो सीटें मिली थी। कभी बंगाल पर लम्बे समय से राज
करने वाली वामपंथी पार्टियों को एक भी सीट नहीं मिली। इंडि गठबंधन में टीएमसी, कांग्रेस और वामपंथी
शामिल है। मगर राज्य में तीनों घटकों में एक दूसरे के प्रति भारी कटुता का वातावरण है। कांग्रेस के राज्य
अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी गाहे बगाहे ममता बनर्जी पर आरोप लगाते रहते है। मार्क्सवादी पार्टी इस राज्य
में कांग्रेस से गठबंधन को तैयार है मगर ममता की पार्टी से हाथ मिलाने को राजी नहीं है। केरल में 2019 में
कांग्रेस नीत यूनाइटेड फ्रंट को 20 सीटों में से 19 में सफलता मिली जबकि वामपंथी मोर्चे को सिर्फ एक सीट
मिली। राहुल गाँधी यूपी में हार गए मगर केरल में एक सीट पर जीतने में सफल हुए थे। यहाँ वर्तमान में
वामपंथी सत्तारूढ़ है। भाजपा के पास कोई सीट नहीं है। मुख्य संघर्ष कांग्रेस नीत मोर्चे और वामपंथी मोर्चे के
मध्य है। यहाँ सीटों का बंटवारा मुश्किल में फंसा है।
- बाल मुकुन्द ओझा