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भारत-जर्मनी व्यापारिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, निवेश बढ़ाने पर जोर

भारत-जर्मनी व्यापारिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, निवेश बढ़ाने पर जोर

नई दिल्ली। भारत और जर्मनी अपने आर्थिक रिश्तों को और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देशों ने व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर तलाशने के साथ-साथ भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की संभावनाओं पर भी चर्चा की है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में हुई बैठकों के बाद यह जानकारी साझा की।

गोयल जर्मनी और नीदरलैंड की यात्रा पर हैं। उनके साथ करीब 100 भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप का प्रतिनिधिमंडल भी गया है। इस दौरे का उद्देश्य भारतीय कारोबारियों के लिए नए बाजारों तक पहुंच बनाने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और दोनों देशों के बीच औद्योगिक साझेदारी को विस्तार देना है।

बर्लिन में गोयल ने जर्मनी की आर्थिक मामलों एवं ऊर्जा मंत्री कैथरीना रीशे के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इसके अलावा, उन्होंने भारत-जर्मनी बिजनेस राउंडटेबल और ‘बर्लिन ग्लोबल डायलॉग’ में हिस्सा लिया। इन बैठकों में व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश और औद्योगिक विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

भारत-ईयू एफटीए से कारोबार बढ़ाने की तैयारी

भारत और जर्मनी के बीच हुई बातचीत में प्रस्तावित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। दोनों पक्षों ने इस समझौते के माध्यम से व्यापार और निवेश के नए रास्ते खोलने की संभावनाओं पर विचार किया।

भारत और जर्मनी के कारोबारी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में आयोजित बिजनेस राउंडटेबल में इस बात पर चर्चा हुई कि मुक्त व्यापार समझौते से मिलने वाले अवसरों को वास्तविक कारोबारी साझेदारी में कैसे बदला जा सकता है। जर्मनी की कई कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और कारोबारी नेताओं ने भी इसमें भाग लिया।

आधिकारिक बयान के अनुसार, पीयूष गोयल ने अपने संबोधन में आर्थिक विकास की रफ्तार तेज करने और व्यापार के नए दौर की शुरुआत पर जोर दिया। वहीं, जर्मन मंत्री कैथरीना रीशे ने मुक्त व्यापार समझौते को औद्योगिक क्षेत्र में व्यावहारिक अवसरों में बदलने की जरूरत पर अपने विचार रखे।

बर्लिन में इंडिया सेंटर का उद्घाटन

भारत-जर्मनी संबंधों को मजबूत करने के लिए एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत पीयूष गोयल और कैथरीना रीशे ने जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (डीजीएपी) के इंडिया सेंटर का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया।

इस केंद्र का उद्देश्य भारत और जर्मनी के संबंधों पर नीतिगत शोध को प्रोत्साहित करना और दोनों देशों के बीच संवाद को बढ़ावा देना है। इससे आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े विषयों पर विचारों के आदान-प्रदान को संस्थागत आधार मिलने की उम्मीद है।

बिजनेस राउंडटेबल का आयोजन डीजीएपी और जर्मन बिजनेस के एशिया-प्रशांत समिति (एपीए) के सहयोग से किया गया। इसमें कारोबार जगत के प्रतिनिधियों ने भारत और जर्मनी के बीच निवेश तथा औद्योगिक साझेदारी को विस्तार देने के संभावित रास्तों पर विचार किया।

वैश्विक साझेदारी और आपूर्ति शृंखलाओं पर जोर

पीयूष गोयल ने ‘बर्लिन ग्लोबल डायलॉग’ के दौरान ‘नया युग, नए गठबंधन: तीसरा रास्ता?’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में भी भाग लिया। इस चर्चा में जर्मन चांसलर के निवेश मामलों के व्यक्तिगत प्रतिनिधि मार्टिन ब्लेसिंग, सिंगापुर के मंत्री डॉ. टैन सी लेंग और मार्सेगाग्लिया स्टील की अध्यक्ष एवं सीईओ एम्मा मार्सेगाग्लिया शामिल हुईं।

चर्चा के दौरान गोयल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में आपसी विश्वास, देशों की आर्थिक क्षमताओं का एक-दूसरे के पूरक के रूप में इस्तेमाल और मजबूत आपूर्ति शृंखलाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में देशों के बीच सहयोग से आर्थिक स्थिरता और व्यापार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

भारत और जर्मनी के बीच बढ़ता संवाद दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को आर्थिक मजबूती देने की कोशिश का हिस्सा है। आने वाले समय में इन चर्चाओं का कितना असर निवेश, कारोबार और औद्योगिक सहयोग पर पड़ता है, यह प्रस्तावित समझौतों और कारोबारी पहलों के आगे बढ़ने पर निर्भर करेगा।

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