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डिजिटल पेमेंट में दुनिया में नंबर वन बन गया है भारत

डिजिटल पेमेंट में दुनिया में नंबर वन बन गया है भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि डिजिटल भुगतान से पारदर्शिता आई है और यदि संभव हो तो
लोगों को नकद भुगतान से बचना चाहिए। भारत में डिजिटल पेमेंट की शुरुआत साल 2016 में
हुई थी। इसके बाद लगातार देश इस क्षेत्र में अपनी बढ़त बनाये हुए है। भारत डिजिटल पेमेंट में
दुनिया में नंबर वन बन गया है और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा मिल रहा है।
भारत सरकार की ओर से बताया गया है कि 2022 में देश में 89.5 मिलियन डिजिटल लेनदेन
हुए हैं जो कि दुनिया में होने वाले कुल रियल टाइम लेनदेन का 46 प्रतिशत है। डाटा के
मुताबिक, 2022 में भारत में कुल 89.5 मिलियन रियल टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन हुए थे, जो
कि पूरी दुनिया में सबसे अधिक है। 89.5 मिलियन रियल टाइम पेमेंट के साथ भारत इस लिस्ट
में टॉप है। इसके बाद 29.2 मिलियन के साथ ब्राजील दूसरे, 17.6 मिलियन के साथ चीन
तीसरे, 16.5 मिलियन के साथ थाइलैंड चौथे और 8 मिलियन के साथ साउथ कोरिया पांचवें
नंबर पर है। सरकारी आंकड़ों की मानें, तो साल 2022 में ऑनलाइन पेमेंट के मामले में बेंगलुरु
पहले, दिल्ली दूसरे और मुंबई तीसरे स्थान पर था। इन तीनों शहरों में सबसे ज्यादा डिजिटल
ट्रांजेक्शन किए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत डिजिल इकोनॉमी वाला
देश बनेगा और हर जगह ऑनलाइन पेमेंट ही की जाएगी।
देश में नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला। लोग कैश के बजाए डिजिटल
मोड में बढ़चढ़ कर पेमेंट करने लगे है । यूपीआई पेमेंट को बढ़ावा मिलने लगा है । विशेषकर नोटबंदी के बाद
भारत में लोगों पर डिजिटल पेमेंट का ऐसा क्रेज चढ़ा दी देश डिजिटल पेमेंट करने वाले देशों की लिस्ट में
टॉप पर शामिल हो गया। देश में यूपीआई ट्रांजैक्शन करने वालों का आंकड़ा दिन-ब-दिन तेजी से बढ़ता ही
जा रहा है। आज डिजिटल ट्रांजैक्शन के कई मोड उपलब्ध हैं और इसका इस्तेमाल करने वाले लोगों की
तादात में जबरदस्त इजाफा हो रहा है।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार डिजिटल इंडिया यानि समय, श्रम और धन की बचत. डिजिटल इंडिया
यानि तेज़ी से लाभ, पूरा लाभ. डिजिटल इंडिया यानि मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिम गवर्नेंस. डिजिटल
इंडिया यानि सबको अवसर, सबको सुविधा, सबकी भागीदारी. डिजिटल इंडिया यानि सरकारी तंत्र तक
सबकी पहुंच, डिजिटल इंडिया यानि पारदर्शी, भेदभाव रहित व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर चोट करना है।
भारत डिजिटल पथ पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। ड्राइविंग लाइसेंस, बर्थ सर्टिफिकेट पानी बिजली के बिल,

इनकम टैक्स रिटर्न आदि अनेक कामों के लिए अब प्रक्रियाएं डिजिटल इंडिया की मदद से बहुत आसान,
बहुत तेज हुई है।
डिजिटल इंडिया भारत सरकार द्वारा आरंभ की गई एक ऐसी अनूठी पहल है जिसका उद्देश्य
सभी छोटे और बड़े सरकारी विभागों को डिजिटल रूप देकर उनकी गति को तीव्र से तीव्रतम कर
देना है। इससे लाभ यह होगा कि बिना कागज के प्रयोग के सभी सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक
रूप से जनता तक निर्वाध रूप से पहुंच सकेंगी व अविलंब कार्य को पूरा किया जा सकेगा। भारत
के हर नागरिक को डिजिटल दुनिया से जोड़ने के लिए सरकार ने यह बेहद महत्वपूर्ण और सही
कदम उठाया है जो आने वाले भविष्य में मील का पत्थर सिद्ध होगा। इससे देश की
अर्थव्यवस्था में अत्यंत सुधार तो होगा ही साथ में देश में नई टेक्नोलॉजी का भी विकास होगा।
डिजिटल इंडिया योजना का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य यह कि ग्रामीण इलाकों को हाई स्पीड इंटरनेट
के माध्यम से जोड़ना भी है। देखा जाए तो डिजिटल इंडिया के तीन कोर घटक हैं : पहला,
डिजिटल आधारभूत ढांचे का निर्माण करना दूसरा, इलेक्ट्रॉनिक रूप से सेवाओं को जनता तक
पहुंचाना और तीसरा, डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना।
ई-कॉमर्स या इ-व्यवसाय इंटरनेट के माध्यम से व्यापार का संचालन है। न केवल खरीदना और बेचना,
बल्कि ग्राहकों के लिये सेवाएं और व्यापार के भागीदारों के साथ सहयोग भी इसमें शामिल है। ई-पेमेंट को
हम इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के नाम से भी जानते हैं ई-पेमेंट या इलेक्ट्रॉनिक ई-पेमेंट किसी भी डिजिटल
फाइनेंसियल पेमेंट लेनदेन है जिसमें दो या दो से अधिक पार्टियों के बीच मनी ट्रान्सफर शामिल है।
इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट इंटरनेट आधारित प्रक्रियाएं हैं। जो ग्राहक या उपयोगकर्ता को उनकी खरीदारी आदि के
लिए ऑनलाइन पेमेंट करने में मदद करती है। इंटरनेट पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए। इनमें मुख्य है
इलेक्ट्रॉनिक कैश, स्मार्ट कार्ड और डेबिट क्रेडिट, गूगल पे, फोन पे आदि।

-बाल मुकुन्द ओझा

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