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धार्मिक पर्यटन की ओर मजबूती से बढ़ता भारत

धार्मिक पर्यटन की ओर मजबूती से बढ़ता भारत

राष्ट्रीय पर्यटन दिवस हर साल 25 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों में
पर्यटन का महत्व जगाने तथा अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए लोगों को जागरूक बनाना है। इस वर्ष की
थीम 'सतत यात्राएं, असामयिक यादें रखी गई है। यह थीम जिम्मेदार और सचेत यात्रा की अवधारणा पर
जोर देती है। यह क्षेत्र जीडीपी और रोजगार सृजन दोनों में योगदान दे सकता है। 2030 तक हमारी
अर्थव्यवस्था में 20 लाख करोड़ रुपये का भारी योगदान देने की क्षमता रखता है। इस प्रभावशाली वित्तीय
निवेश के अलावा, इसमें 13 से 14 करोड़ नए रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता है।
देश के कण कण में पर्यटन स्थल बिखरे पड़े है। इनमें धार्मिक स्थलों की तरफ लोग अधिक
आकर्षित हुए है। भारत में लगभग 30 लाख धर्मस्थल हैं। देश के बहुत से धार्मिक स्थलों पर
लाखों लोगों का आना जाना लगा रहता है। आवश्यकता इस बात की है कि इन स्थलों पर सभी
प्रकार की सुविधाएं सुलभ कराई जाये ताकि ये पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होकर रोजगार
और अर्थव्यवस्था की धुरी बन सके। अयोध्या में राम लला के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद
देश में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन की ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। पुरी, वाराणसी और
तिरुपति जैसे धार्मिक स्थलों के बाद अब अयोध्या नगरी देश के ही नहीं अपितु दुनिया के बड़े
धार्मिक केन्द्र के रूप में विकसित होंगी। इससे हमारे धार्मिक पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
इस सम्बन्ध में वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने एक ताज़ा रिपोर्ट में बताया है कि अयोध्या में
राम मंदिर सालाना पांच करोड़ से अधिक पर्यटकों को आकर्षित कर भारत की पर्यटन क्षमता को
एक नए स्तर पर ले जाने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
पर्यटन आज देश और दुनिया का सबसे बड़ा उद्योग बन गया है। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में वहां का
पर्यटन उद्योग रीढ़ की हड्डी होता है। उस क्षेत्र में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों से ही वहां के सभी
उद्योग संचालित होते हैं। पर्यटन दिवस मनाने का अर्थ है अधिक से अधिक जगह पर घूमने जायें, वहां
सुन्दर और मन को मोह लेने वाले स्थलों का आनंद लें। इन सुन्दर यादों को सहेजकर रखने से बहुत कुछ
सीखा जा सकता है। पर्यटन से जीवन में शांति मिलती है। पर्यटन का असर सिर्फ आर्थिक विकास पर ही
नहीं बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनैतिक विकास पर भी पड़ता है।
भारत में पर्यटन सबसे बड़ा सेवा उद्योग है, जहां इसका राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में 6.23 प्रतिशत और
भारत के कुल रोज़गार में 8.78 प्रतिशत योगदान है। एक रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय आउटबाउंड पर्यटन

का बाजार 2024 तक 42 अरब डॉलर तक तथा 2025 तक 45 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। यह दुनिया का
तेजी से विकसित होता बाजार है जहां 8 करोड़ पासपोर्ट यूजर्स, खासतौर पर मध्यम वर्ग में अच्छी खरीद
क्षमता है। भारत सरकार के मुताबिक देश का पर्यटन क्षेत्र 2024 के मध्य तक महामारी-पूर्व स्तर पर आ
जाएगा और देश के जीडीपी में 2030 तक 250 अरब डॉलर का योगदान देगा।
भारत एक ऐसा देश हैं जहां एक से बढ़कर एक प्राकृतिक परिदृश्य देखने को मिलते हैं। यहां आकर आप ऐसी
घाटियों और गांवों की सैर कर सकते हैं जिसे अब तक ज्यादा एक्सप्लोर नहीं किया गया है। पर्यटन की
दृष्टि से भारत विश्व का एक अजब गजब देश है जहाँ समुद्र से लेकर जंगल और बर्फ से लेकर रेगिस्तान
तक देखने को मिल जायेंगे। हरे-भरे घास के मैदान और पथरीली जमीन भी आपको यहीं मिल जाएगी।
पर्यटन की दृष्टि से भारत में घूमने लायक कई ऐसी जगहें हैं जो अपनी खूबसूरती से आपका मन मोह लेंगी।
देश की शान ताजमहल, कश्मीर, कन्या कुमारी, गोवा, केरल, जयपुर, दिल्ली, दार्जीलिंग, उत्तराखंड का
पहाड़ी क्षेत्र आदि मंत्रमुग्ध करने वाले स्थल इसी देश में है। इंडिया गेट, हुमायूँ का मकबरा, कुतुब मीनार,
बुलंद दरवाजा, लाल किला आगरा, चारमीनार, गेटवे ऑफ इंडिया, लोटस टैंपल, खजुराहो, साँची, हम्पी,
अजंता की गुफाएं, एलोरा की गुफाएं उदयगिरि गुफाएँ इलौरा आदि देश के पर्यटन क्षेत्र बरबस आपको अपनी
और खिंच लेते है। विविधता और प्राकृतिक सुन्दरता से भारत पर्यटन के लिए हर किसी की पसंदीदा जगह
हैं। देश के पहाड़ी क्षेत्र गर्मियों के रिसॉर्ट्स बने रहते हैं। इनमें पचमढ़ी, अरकु, गुलमर्ग, श्रीनगर, लद्दाख,
दार्जिलिंग, मुन्नार, ऊटी और कोडाइकनाल, शिलांग, शिमला, कुल्लू, मसूरी, देहरादून नैनीताल, गंगटोक
आदि प्रमुख है।

 -   बाल मुकुंद ओझा

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