पाकिस्तान की हरकत पर भारत का जवाब होगा और बड़ा : राजनाथ सिंह
नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि अगर भविष्य में उसकी ओर से कोई आतंकी हरकत हुई तो भारत पहले से भी बड़ा प्रहार करेगा। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने जब-जब भारत को निशाना बनाया, देश की सेनाओं ने उसका जवाब दिया है। उनके मुताबिक, भारत की पिछली सैन्य कार्रवाइयों का संदेश आज भी आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों तक पहुंचता होगा।
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में वर्ष 2016 के उरी आतंकी हमले के बाद की गई सर्जिकल स्ट्राइक का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस कार्रवाई में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इसके साथ ही उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को आधुनिक तकनीक पर आधारित सैन्य अभियान का उदाहरण बताया।
ऑपरेशन सिंदूर में आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल
राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में आकाश तीर, आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसी उन्नत प्रणालियों के साथ कई आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इसे भारतीय सेनाओं की तकनीकी क्षमता और बदलते युद्ध के तरीकों के अनुरूप तैयारी का उदाहरण बताया।
रक्षा मंत्री के मुताबिक, सेना के पास मौजूद 175 प्रकार के गोला-बारूद में से 159 प्रकार स्वदेशी हैं। उनके अनुसार, यह गोला-बारूद के प्रकारों के लिहाज से 90 प्रतिशत से अधिक आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। सरकार का जोर सैन्य जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भरता कम करने और देश में ही आधुनिक रक्षा तकनीक विकसित करने पर है।
रक्षा निर्यात 38 हजार करोड़ रुपये के पार
रक्षा क्षेत्र में उत्पादन और निर्यात का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2013-14 में भारत का रक्षा निर्यात 686 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 38,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षा उत्पाद करीब 200 देशों को निर्यात किए जा रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि निर्यात में बढ़ोतरी से भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और भारतीय तकनीक पर भरोसे को भी बल मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य ऐसा भारत बनाना है जो शांति का समर्थन करे, लेकिन अपनी संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में भी सक्षम हो।
उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का मतलब केवल हथियारों का घरेलू उत्पादन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को गति देना और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में भारत की भूमिका मजबूत करना भी है।
रक्षा उद्योग में MSME और स्टार्टअप की बढ़ती भागीदारी
राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत का रक्षा उत्पादन अब केवल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों तक सीमित नहीं है। रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों के साथ 16 हजार से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), हजारों आपूर्तिकर्ता और देशभर के नवाचार केंद्र इस क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की भूमिका भी अब अनुसंधान तक सीमित नहीं है। यह उद्योगों, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप और वैज्ञानिकों को जोड़कर नई तकनीकों के विकास में सहयोग कर रहा है।
रक्षा मंत्री के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने MSME से 2,400 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद को मंजूरी दी है। इसके अलावा, नई तकनीक विकसित करने के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इन पहलों का उद्देश्य घरेलू कंपनियों को रक्षा उत्पादन की जरूरतों से जोड़ना और नए आविष्कारों को बढ़ावा देना है।
रक्षा खरीद और आधुनिकीकरण पर जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा भारतीय उद्योगों से खरीद के लिए रखा गया है। उन्होंने रक्षा खरीद में पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करने तथा स्वदेशीकरण को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि पहले छोटी से छोटी जरूरत के लिए भी भारत को आयात पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब देश में छोटे उपकरणों से लेकर अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों तक के निर्माण की क्षमता विकसित की जा रही है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की सेनाएं हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं और देश की शांति के प्रति प्रतिबद्धता भी बरकरार है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2047 तक भारत न केवल विकसित देश बनेगा, बल्कि तकनीक, अर्थव्यवस्था और रक्षा जैसे क्षेत्रों में भी वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत करेगा।