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किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के निर्देश, डीएपी के विकल्प एसएसपी को बढ़ावा देने पर जोर

किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के निर्देश, डीएपी के विकल्प एसएसपी को बढ़ावा देने पर जोर

उर्वरक वितरण व्यवस्था होगी पारदर्शी: निरीक्षण अभियान और कंट्रोल रूम की स्थापना

झालावाड़। जिले में कृषकों को समय पर एवं पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, वितरण व्यवस्था को पारदर्शी एवं सुचारू बनाने तथा अनैतिक कार्यवाहियों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से जिला स्तरीय फर्टिलाइज़र डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेटरी टास्क फोर्स की बैठक जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में सोमवार को मिनी सचिवालय सभागार में आयोजित की गई। बैठक में जिला कलक्टर ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि आगामी कृषि सीजन को दृष्टिगत रखते हुए उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को निर्धारित दरों पर ही उर्वरक उपलब्ध कराए जाएं तथा किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या अनियमितता पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। जिला कलक्टर ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करें तथा स्टॉक, वितरण एवं मूल्य सूची का भौतिक सत्यापन करें। साथ ही उर्वरकों की उपलब्धता, मांग एवं आपूर्ति की स्थिति पर सतत निगरानी रखते हुए आवश्यकतानुसार उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाए।

जिला कलक्टर द्वारा डीएपी के स्थान पर राज्य में उत्पादित होने वाले सिंगल सुपर फॉस्फेट को अधिकाधिक उपयोग को बढावा देने, अन्य वैकल्पिक उर्वरक जैसे एनपीके कॉम्पलेक्स, जैविक खादों आदि को बढ़ाने, कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार संतुलित उर्वरक उपयोग को बढावा देने, गर्मियों में मृदा की उर्वरता को बढावा देने के लिये हरी खाद जैसे ढैंचा का उपयोग करने के निर्देश प्रदान किये गये। साथ ही उर्वरक निर्माता कॅम्पनियों को भी निर्देशित किया गया कि जिले में आपूर्तित उर्वरकों के साथ किसी भी प्रकार की टेंिगंग नहीं की जाए। बैठक में उर्वरकों की वर्तमान उपलब्धता, वितरण की प्रगति, मांग-आपूर्ति की स्थिति तथा आगामी रणनीति पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार झालावाड़ डॉ. नरेश कुमार शर्मा द्वारा बताया गया कि आगामी खरीफ हेतु उर्वरको की मांग कृषि आयुक्तालय राजस्थान जयपुर को भिजवायी जा चुकी हैं। वर्तमान में जिले में 16940 मै.टन यूरिया, 3726 मै.टन डीएपी, 27648 मै.टन सिंगल सुपर फॉस्फेट एवं 3194 मै.टन एनपीके कॉम्पलेक्स उपलब्ध है। विभाग द्वारा डीएपी के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फॉस्फेट एवं एनपीके कॉम्पलेक्स को बढावा देने के लिये एवं कृषको को संतुलित उर्वरकों के उपयोग को बढावा देने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में कृषक गोष्ठियों का आयोजन करने का मास्टर प्लान तैयार किया गया है।

उन्होंने बताया कि 29 मार्च से 31 मार्च तक जिले के उर्वरक विक्रेताओं का सघन निरीक्षण कार्यक्रम भी वर्तमान में चलाया जा रहा है। जिसके अन्तर्गत यदि विक्रेता के पीओएस बैलेन्स एवं भौतिक स्टॉक में अन्तर पाया जाता है तो संबंधित के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। जिला स्तर पर कन्ट्रोल रूम की स्थापना की गई है जो आने वाली कृषकों की शिकायतों का रिकार्ड संधारित करेगी और कृषकों को सुगमतापूर्वक उर्वरक उपलब्ध करवाने में सहयोग करेगी। जिले के सभी उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठान पर विभागीय कृषि पर्यवेक्षक को सहायक नोडल अधिकारी एवं सहायक कृषि अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जा रहा हैं जो उर्वरक विक्रेता के प्रतिष्ठान पर निगरानी रखेगी एवं साथ ही पीक सीजन के दोहरान अपनी निगरानी में उर्वरक का वितरण करवायेगी। इस अवसर पर जिला परिषद सीईओ शंभु दयाल मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भागचन्द मीणा, उप रजिस्ट्रार अवतार सिंह मीणा एवं इफको, चम्बल फर्टिलाईजर्स एण्ड केमिकल्स लिमिटेड, आई.पी.एल., के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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