जीवन में अहिंसा व मेत्रीभाव होना आवश्यक
मदनगंज किशनगढ़। हाउसिंग बोर्ड स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में दम उपदेश देते हुए आर्यिका यशस्विनीमति माताजी ने कहा कि जीवन में अहिंसा व मैत्री भाव होना आवश्यक है। जैन धर्म में सब जीवों के प्रति संयमपूर्ण व्यवहार अहिंसा है। हिंसा न करना ही अहिंसा है। राग द्वेषात्मक प्रवृत्ति न करना, प्राणवध न करना या प्रवृत्ति मात्र का विरोध करना निषेधात्मक अहिंसा है। सत्प्रवृत्ति, स्वाध्याय, अध्यात्मसेव, उपदेश, ज्ञानचर्चा आदि आत्म हितकारी व्यवहार विध्यात्मक अहिंसा है। निषेधात्मक अहिंसा में केवल हिंसा का वर्जन होता है। हिंसा न करने वाला यदि आँतरिक प्रवृत्तियों को शुद्ध न करे तो वह अहिंसा न होगी। इसलिए निषेधात्मक अहिंसा में सत्प्रवृत्ति की अपेक्षा रहती है। अहिंसा व मैत्री भाव से जीवन को सफल बनाया जा सकता है। प्रातः श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा हुई। दोपहर में महिलाओं के लिए शंका समाधान कार्यक्रम आयोजित किया गया। शाम को आरती की गई। इस दौरान आनंद बज, राकेश बोहरा, कमल गदिया, अशोक सेठी, गजेंद्र पाटनी, सुभाष सेठी, अजीत बाकलीवाल, कनक बज, मंजू बोहरा सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद थे।