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जयपुर: विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बाड़मेर जिला कलक्टर टीना डाबी को जल संचय जन भागीदारी में प्रथम पुरस्कार से किया सम्मानित

जयपुर: विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बाड़मेर जिला कलक्टर टीना डाबी को जल संचय जन भागीदारी में प्रथम पुरस्कार से किया सम्मानित

जयपुर। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने जल संचय—जन भागीदारी में बाड़मेर के प्रथम स्थान पर रहने पर जिला कलेक्टर टीना डाबी को पुरस्कृत किया है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार व जल संचय—जन भागीदारी पुरस्कार में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सभ्यता और जल में सीधा सम्बंध है। दुनियाभर की सभ्यताएं नदियों, बांधों के किनारे विकसित हुई। जल का महत्व इससे आंका जा सकता है कि वंदे मातरम का पहला शब्द सुजलाम है। सरकार के साथ ही व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक प्रयास और समन्वय से ही जल संरक्षण की योजनाओं को सफल बनाया जा सकता है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने केंद्र और राज्य सरकारों, जिला प्रशासनों, ग्राम पंचायतों और नगर निकायों के स्तर पर जल संरक्षण और उसके सुसंगत प्रबंधन को प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने किसानों और उद्यमियों को जल का उपभोग कम करते हुए उत्पादन को अधिकतम करने के नवोन्मेषी तरीके अपनाने की सलाह दी। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के महत्वपूर्ण अभियान ''कैच द रेन'' को बाड़मेर जिले में अपार सफलता मिली है। इसे जन आन्दोलन बनाकर धरातल पर लागू करने के लिए जिला कलेक्टर टीना डाबी ने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देशन में अभूतपूर्व प्रयास किए हैं। इस नवावार को केन्द्र सरकार ने जल संचय जन भागीदारी अभियान में प्रथम पुरस्कार के लिए चुना। टांका निर्माण के जरिए बारिश के पानी को सहेजने की अभिनव पहल के तहत प्रथम श्रेणी में चयनित बाड़मेर जिले को 2 करोड़ रुपए के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। बाड़मेर जिला कलक्टर टीना डाबी ने इस सफलता का श्रेय बाड़मेर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों एवं कार्मिकों की टीम को देते हुए बताया कि टीम वर्क के चलते यह कामयाबी मिल पाई। आगामी समय में बेहतरीन कार्य करने का प्रयास किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि बाड़मेर जिले में बारिश के पानी को सहेजने के लिए वृहद स्तर पर टांकों का निर्माण कराया गया है। इसकी बदौलत अब तक व्यर्थ में बहने वाला बारिश के पानी को ग्रामीण पेयजल के बतौर इस्तेमाल कर रहे है। इस अभियान के तहत जल संरक्षण के लिए जल संरचनाओं में भवनों की छतों पर वर्षा जल संचयन के साथ झीलों, तालाबों और बावड़ियों का पुनरुद्धार किया जाता है। प्रथम जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) सम्मान के अंतर्गत इस वर्ष कुल 100 पुरस्कारों की घोषणा की गई। इनमें तीन शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य, 67 जिले, छह नगर निगम एक शहरी स्थानीय निकाय, दो सहयोगी मंत्रालय, विभाग, दो उद्योग, तीन गैर सरकारी संगठन, दो परोपकारी और 14 नोडल अधिकारी शामिल हैं।

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