जयपुर वासियों ने देखी सेना परेड की रिहर्सल
दूसरी परेड रिहर्सल में भारी तादात में पहुंचे लोग,अब मंगलवार को होगी रिहर्सल ,15 को होगी फाइनल परेड
जयपुर। जयपुर के जगतपुरा का महल रोड रविवार को करीब 5 घंटे छावनी बना रहा। मौका था सेना दिवस पर होने वाले परेड के रिहर्सल का। जिधर नजर जा रही थी, उधर खाकी वर्दी में कदमताल करते सेना के जवान दिख रहे थे। धरती से अत्याधुनिक टैंक तो आसमान से लड़ाकू हेलिकॉप्टर ने सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया। 15 जनवरी को होने वाली 78वीं आर्मी डे परेड से पहले फुल ड्रेस रिहर्सल का यह दूसरा दिन था। इससे पहले 9 जनवरी को रिहर्सल हुई थी। रविवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे रिहर्सल शुरू हुई, जो दोपहर करीब दोपहर डेढ़ बजे तक चली। इस दौरान टैंक, मिसाइल, ड्रोन, लड़ाकू विमान और आधुनिक हथियारों का प्रदर्शन किया गया। सेना के जवानों ने बाइक पर एक से बढ़कर एक करतब दिखाए।
7 बाइकों पर 27 जवानों ने ह्यूमन पिरामिड बनाया। इस दौरान मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर भी दिखाया गया। यह 20 सेकेंड में एक साथ 40 से ज्यादा रॉकेट दाग सकता है। भारतीय सेना के अपाचे AH-64E, चीता और चेतक हेलिकॉप्टर ने भी आसमान में शक्ति का प्रदर्शन किया। K-9 वज्र टी टैंक भी आकर्षण का केंद्र रहा। यह 45 किमी दूर तक दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकता है।
300KM तक मार करने वाले रॉकेट लॉन्चर की खूबियों से भी लोग रूबरू हुए। यह एक साथ 6 मिसाइल दाग सकता है। रिहर्सल के दूसरे दिन रविवार को भारतीय सेना के तमाम शक्तिशाली टैंकों और मिसाइलों को दिखाया गया। इनमें हेलिकॉप्टर अपाचे, प्रचंड, डायमंड शेप समेत अलग अलग लड़ाकू ड्रोन विमानों ने उड़ान भरी। परेड में जल, थल और वायु तीनों जगहों पर सेना की शक्ति का प्रदर्शन किया गया। हाई मोबिलिटी रिकॉनिसेंस व्हीकल (HMRV) भारतीय सेना में इस्तेमाल होने वाले खास बख्तरबंद वाहन हैं, जिन्हें तेजी से मूवमेंट और निगरानी के लिए तैयार किया गया है। ये वाहन मैदानी इलाकों के साथ-साथ रेगिस्तानी और बर्फीले पहाड़ी क्षेत्रों में भी प्रभावी तरीके से काम कर सकते हैं। करीब 5 हजार मीटर की ऊंचाई तक ऑपरेशन के लिए सक्षम हैं। HMRV में आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम और हथियार लगाने की सुविधा होती है।
इससे सैनिक सुरक्षित रहते हुए दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं और अहम सामरिक जानकारी जुटा सकतेहैं। रिहर्सल के दौरान चलती बाइक पर भारतीय सेना के जवानों ने सुदर्शन चक्र की आकृति बनाकर दिखाया। संदेश साफ है कि जिस तरह जरूरत पड़ने पर श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र उठाया, उसी तरह भारतीय सेना भी दुश्मनों का नाश करने के लिए चक्र लेकर हमेशा तैयार रहती है। अर्जुन मार्क-1 टैंक भी सेना के लिए खासा मददगार साबित होता है। यह भारत का स्वदेशी मेन बैटल टैंक है, जिसे भारतीय सेना के लिए तैयार किया गया है। यह टैंक अपनी जबरदस्त फायर पावर, मजबूत कवच (आर्मर) से मिलने वाली सुरक्षा और मॉडर्न टेक्नोलॉजी के लिए जाना जाता है। इसमें ऐसा फायर कंट्रोल सिस्टम लगा है, जिससे दिन और रात दोनों समय सटीक निशाना लगाया जा सकता है। अर्जुन का नया वर्जन मार्क-1A 72 नए फीचर्स और सुधारों के साथ सेना में शामिल किया गया है, जिससे इसकी परफॉर्मेंस और भरोसेमंद क्षमता और बेहतर हुई है।