जायल : बागवानी को तैयार कर पर्यावरण एवं पक्षियों को किया समर्पित
जायल। डेह कस्बे में बागवानी फसलों में फल, फूल, और सब्जियों की खेती, धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रही है। विशेष रूप से, शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में, बागवानी किसानों के लिए एक लाभदायक व्यवसाय बन रही है। ऐसा ही एक उदाहरण डेह गांव का है व्यवसाई कैलाश गौतम जिसने अपने खेत में बागवानी लगाने का सपना को साकार किया है। गौतम ने एक साल पहले पुष्कर अजमेर से आम चीकू ,नींबू ,पपीता, अमरूद ,संतरा बैर ,केरुंदा ,अनार, केला ,अर्जुन छाल ,पत्थरचट्टा ,अंजीर ,सीताफल जामुन ,लालचंदन ,सागवान ,शीशम अडूसा ,बेलपत्र, सेजन ,मीठानीम, बनास्पति गुंदा ,हरसिंगार गूगल, बिजोरा निंबू के तीन सौ पौधे लगाए । सभी पौधे अच्छी ग्रोथ के साथ बढ़ रहे हैं पौधों में समय-समय पर प्राकृतिक खाद का प्रयोग किया गया और पौधों में बूंद बूंद सिंचाई से पानी पिलाया और आज सभी पौधे 5 से 6 फीट के हो गए हैं गौतम ने यह पौधे पथरीली जमीन पर लगाकर यह साबित कर दिया कि मनुष्य अगर ठान ले तो कुछ भी कर सकता है उनका पर्यावरण के प्रति समर्पण से एक अच्छी बागवानी तैयार हो गई है
पर्यावरण प्रेमी गोपाल छाबा ने बताया कि यह बगीचा पक्षियों के लिए समर्पित है इसमें पक्षियों को अलग-अलग ऋतु में भोजन मिलता रहेगा उनके खाने के बाद जो शेष बचेगा उस वह अपने दैनिक जीवन में काम लेंगे । इस बागवानी में ज्यादातर फल फ्रूट के पौधे हैं यह एक अनूठा उदाहरण है जब कोई व्यक्ति अपनी जेब से खर्च कर पक्षीयों और पर्यावरण को समर्पित किया है ।