जोधपुर: मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित
प्रदेश सरकार ने सिरप के संदिग्ध बैचों की आपूर्ति रोकी, कड़ी जांच और निलंबन की कार्रवाई
जोधपुर । राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ और सुरक्षित दवाएँ उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में चिकित्सा विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के तहत करोड़ों लोगों को निःशुल्क दवा वितरित की जा रही है और इस योजना में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक कठोर — “फुल-प्रूफ” — प्रणाली लागू की गई है। विभागीय विज्ञप्ति में बताया गया है कि सामान्यत: किसी भी दवा के बाज़ार में आने से पहले निर्माताओं द्वारा निश्चित प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य होता है। इसके अतिरिक्त, नि:शुल्क दवा योजना के तहत जो भी कम्पनी राज्य को दवा सप्लाई करती है, उसके प्रत्येक बैच के सैंपल आरएमएससीएल द्वारा पुन: परीक्षण के लिए लिए जाते हैं। परीक्षण मानकों पर खरा न उतरने पर उस बैच के वितरण पर रोक लगा दी जाती है और नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाती है।
हाल ही में मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना में आपूर्ति की जाने वाली Dextromethorphan HBr Syrup IP 13.5mg/5ml के कुछ बैचों के संदर्भ में शिकायतें प्राप्त हुईं। क्रमश: 28.09.2025 को बैच संख्या KL-25/147 (भरतपुर) तथा 29.09.2025 को बैच संख्या KL-25/148 (सीकर) के बारे में मीडिया तथा विभागीय स्तर पर असंतोषजनक प्रतिक्रियाएँ आईं, जिनमें सिरप के सेवन के बाद उल्टी, नींद, घबराहट, चक्कर तथा बेहोशी जैसी शिकायतें दर्ज हुईं। मिली शिकायतों के आधार पर विभाग ने तत्काल प्रभाव से संदिग्ध बैचों के वितरण व उपयोग पर रोक लगा दी और वैधानिक नमूने राजकीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला को जांच के लिए भेजे गए। जांच के दौरान अलग-अलग जिलों में सामने आए कुछ दुखद चिकित्सा प्रकरणों का भी परीक्षण किया गया। उपलब्ध चिकित्सा रिकॉर्ड और प्राथमिक जांच से यह निष्कर्ष निकला कि तीनों मृत्यु-प्रकरणों (भरतपुर/सीकर/झुंझुनू मामलों) में Dextromethorphan सिरप का प्रत्यक्ष उपयोग या उसका प्रयोग कर मृत्यु होने की पुष्टि प्राथमिक स्तर पर नहीं हुई।
उदाहरणतः सीकर के नित्यांश शर्मा को 07.07.2025 को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चिराना में दिखाया गया था — उस रिकॉर्ड में Dextromethorphan HBr का कोई उल्लेख नहीं पाया गया; वहीं भरतपुर के सम्राट की मृत्यु एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम के कारण हुई और तीर्थराज की मृत्यु एक्यूट एन्सेफलाइटिस से हुई — दोनों प्रकरणों में भी दवा का प्रत्यक्ष संबंध नहीं मिला। वहीं कुछ नाममात्र के मामलों में — जैसे ग्राम कलसाडा भरतपुर एवं हाथीदेह (सीकर) के दो बच्चों में — दवा देेने के प्रमाण मिले थे और उन बच्चों को इलाज के बाद सेहतमंद पाया गया। पीएचसी हाथीदेह की चिकित्सक डॉ. पलक कूलवाल और फार्मासिस्ट पप्पू सोनी को इन मामलों में अनियमितता पाए जाने पर तत्काल निलंबित कर दिया गया है। ड्रग-टेस्टिंग लैब की ताज़ा रिपोर्टों में जिन छह सैंपलों की जांच की गई, वे सभी स्टैंडर्ड क्वालिटी के पाए गए। तथापि एहतियातन कदम के रूप में सरकार ने कायसन फार्मा, जयपुर द्वारा सप्लाई की जा रही सभी 19 प्रकार की दवाओं के उपयोग एवं वितरण पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है। कंपनी के अब तक के रिकॉर्ड के अनुसार 2012 से अब तक कुल 10,119 सैंपल लिए जा चुके हैं, जिनमें से 42 सैंपल किसी न किसी कारण से अमानक पाए गए — जबकि हालिया नमूनों में कोई खामी नहीं मिली है। उल्लेखनीय है कि संदिग्ध बैचों से अब तक लगभग 1,41,000 डोज़ वितरित की जा चुकी हैं और वर्तमान में कहीं से भी ऐसी कोई व्यापक विपरीत रिपोर्ट नहीं मिली है।
केंद्र सरकार ने 2021 से Dextromethorphan दवा के उपयोग पर एहतियातन निर्देश दिए हुए थे, जिनमें चार वर्ष से छोटे बच्चों को यह दवा न देने की सलाह शामिल थी। ताज़ा निर्देशों में ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने यह भी कहा है कि सामान्यत: 5 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को ही यह दवा दी जाए और 2 वर्ष से छोटे बच्चों को किसी भी परिस्थिति में यह दवा न देने की सख्त हिदायत दी गई है। राज्य सरकार ने इन निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सभी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी दवा को बांटने या लिखने से पहले रोगी/परिजन को ठीक-ठीक परामर्श (proper counselling) दिया जाए। सरकार ने यह भी बताया कि संवेदनशील वर्ग — बच्चों और गर्भवती महिलाओं — के लिए हानिकारक हो सकने वाली दवाओं पर स्पष्ट चेतावनी अंकित करने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है तथा COPD जैसी बीमारियों के इलाज में प्रयुक्त होने वाली दवाओं की खरीद और आपूर्ति को नियंत्रित किया जाएगा। सामान्य खांसी के इलाज के लिए वैकल्पिक सुरक्षित दवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। अंतिम पदक्षेप में चिकित्सा विभाग ने कहा है कि दवा सुरक्षा और मरीजों की जान-माल की रक्षा के मामले में राज्य की नीति सख्त और पारदर्शी रहेगी। अगर किसी भी स्तर पर प्रक्रिया में चूक पाई जाती है तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी — और इस दिशा में आवश्यक ढांचा सक्रिय रूप से लागू किया जा रहा है।