कोटा: रबी बुवाई के लिए कोटा-बून्दी में नहीं होगी खाद की कमी पर्याप्त भंडारण और लगातार आपूर्ति से किसानों को होगी सुविधा
कोटा। कोटा-बून्दी क्षेत्र में इस वर्ष अच्छी बारिश होने से रबी की बुवाई का रकबा बढ़ने की संभावना है। कृषि विभाग की ओर से क्षेत्र में खाद की पर्याप्त उपलब्धता को लेकर पहले से तैयारी की जा रही है ति किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया, डीएपी और एनपीके उपलब्ध हो सके। संयुक्त निदेशक कृषि (वि.) कोटा अतीश कुमार शर्मा ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के निर्देशों पर जिले में रबी फसलों के लिए उर्वरकों की आपूर्ति और वितरण की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
शर्मा ने जानकारी दी कि कृभको की 2600 मीट्रिक टन डीएपी की खेप रविवार को पहुंच चुकी है। इसके बाद 29 सितम्बर को इफको का 2600 मीट्रिक टन डीएपी, 30 सितम्बर को चंबल फर्टिलाइजर्स का 1000 मीट्रिक टन और नर्मदा बायोकेम का 1300 मीट्रिक टन डीएपी आने वाला है। 3 अक्टूबर को कृभको और कोरोमंडल इंटरनेशनल से 2600-2600 मीट्रिक टन डीएपी की और आपूर्ति होगी। अगले सप्ताह तक जिले को कुल 8 से 9 हजार मीट्रिक टन डीएपी मिल जाएगा।
खाद की है पर्याप्त उपलब्धता
उन्होंने बताया कि फिलहाल जिले में 10,420 मीट्रिक टन यूरिया, 2363 मीट्रिक टन डीएपी, 4451 मीट्रिक टन एनपीके और 12,211 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट उपलब्ध है। अच्छी वर्षा के चलते इस बार गेहूं, सरसों और धनिया की बुवाई का रकबा बढ़ने की संभावना है। रामगंजमंडी और इटावा क्षेत्रों में सरसों की बुवाई शुरू भी हो चुकी है।
सरसों के लिए बेहतर विकल्प
विशेषज्ञों का कहना है कि सरसों जैसी तिलहनी फसल के लिए सल्फर बेहद जरूरी पोषक तत्व है, जो तेल और प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है। फोर्टीफाइड सिंगल सुपर फॉस्फेट (ैैच्) में 16ः फॉस्फोरस, 11ः सल्फर, 19-20ः कैल्शियम, 0.5ः जिंक और 0.2ः बोरॉन होता है। शोध से साबित हुआ है कि सल्फर की कमी वाली मिट्टी में ैैच् के उपयोग से सरसों की पैदावार 20 से 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
तीन-एक के मिश्रण से करे उपयोग
शर्मा ने बताया कि डीएपी के मुकाबले तीन बैग सिंगल सुपर फॉस्फेट और एक बैग यूरिया का मिश्रण किसानों के लिए अधिक लाभकारी है। इससे 12 किलो नाइट्रोजन, 16.5 किलो सल्फर, 0.75 किलो जिंक और 27-32 किलो कैल्शियम अतिरिक्त मिलता है। इसमें मौजूद कैल्शियम मिट्टी सुधारक का भी काम करता है, जिससे खेत की उर्वरक क्षमता और उत्पादन दोनों बढ़ते हैं।