कोटा विश्वविद्यालय ने मेघा गांग को शोध उपाधि प्रदान की
कोटा । कोटा विश्वविद्यालय के कैमेस्ट्री विभाग की शोधार्थी मेघा गांग ने ग्रीन कैमेस्ट्री पर आधारित विषय स्टडीज ऑन ग्रीनर सिंथेसिस ऑफ एक्टिवेटेड कार्बन बेस्ड नेनोपार्टिकल्स एंड देयर केरेक्टेरिजेशन फॉर एप्पलीकेशन इन हैवी मेटल रिमूवल फ्रॉम कनामिनटेड वाटर पर सहायक आचार्य डॉ. श्वेता व्यास के निर्देशन में शोध कार्य पूर्ण किया।
सहायक आचार्य ने बताया कि विषय पर शोध के दौरान मेघा ने आइस एप्पल फ्रूट शैल वेस्ट से ‘‘वेस्ट से वेल्थ‘‘ के कॉन्सेप्ट पर एक्टिवेटेड कॉर्बन के नेनोकॉम्पोजिट्स संश्लेषण किया। नैनो पार्टिकल्स को बनाने में भी उन्होनें वेस्ट नारंगी के छिलकों के निष्कर्षण को प्रयोग में लिया ताकि पूर्ण प्रक्रम में कम से कम हानिकारक रसायनोें को प्रयुक्त किया जा सके। उन्होंने बताया कि विधी हरित रसायन विज्ञान के बारह सिद्धान्तों पर आधारित हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषण कम होता है। संश्लेषित नेनोकॉम्पोजिट्स पर सतही अधिशोषण के द्वारा पानी में मौजूद भारी धातु आयनों का निष्कासन करने में सफलता प्राप्त की। लेड, कैडमियम और क्रोमियत जैसे धातुओं के प्रदूषित पानी में रहने के कारण ये पानी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन जाता हैं। उन्होंने बताया कि ये नेनोकॉम्पोजिट्स जहाँ एक और भारी धातुओं को पानी से निष्कासित करते हैं वहीं दूसरी और ठोस अवशिष्ट प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सहायक आचार्य ने बताया कि विषय पर शोध के दौरान मेघा ने आइस एप्पल फ्रूट शैल वेस्ट से ‘‘वेस्ट से वेल्थ‘‘ के कॉन्सेप्ट पर एक्टिवेटेड कॉर्बन के नेनोकॉम्पोजिट्स संश्लेषण किया। नैनो पार्टिकल्स को बनाने में भी उन्होनें वेस्ट नारंगी के छिलकों के निष्कर्षण को प्रयोग में लिया ताकि पूर्ण प्रक्रम में कम से कम हानिकारक रसायनोें को प्रयुक्त किया जा सके। उन्होंने बताया कि विधी हरित रसायन विज्ञान के बारह सिद्धान्तों पर आधारित हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषण कम होता है। संश्लेषित नेनोकॉम्पोजिट्स पर सतही अधिशोषण के द्वारा पानी में मौजूद भारी धातु आयनों का निष्कासन करने में सफलता प्राप्त की। लेड, कैडमियम और क्रोमियत जैसे धातुओं के प्रदूषित पानी में रहने के कारण ये पानी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन जाता हैं। उन्होंने बताया कि ये नेनोकॉम्पोजिट्स जहाँ एक और भारी धातुओं को पानी से निष्कासित करते हैं वहीं दूसरी और ठोस अवशिष्ट प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।