रमजान का आखिरी जुम्मा अल्लाह का शुक्रिया और अमन-शांति की दुआ
सीकर। शुक्रवार को रमजान के अलविदा जुम्मा को लेकर शहर में सुबह से ही तैयारी शुरू हो गई थी। शहर की मस्जिद में में जुमे की नमाज अदा की । इमाम ने बताया कि पहले जुमे को नमाज में विशेष खिताब रमजान से जुड़ा। रमजान में अल्लाह का जितना शुक्र अदा किया जाए उतना ही कम है। उसने हमको मुकद्दस रमजान का महीना अता फरमाया। इस पाक महीने में अल्लाह हर दुआ को कुबूल करता है। इस्लाम में सबसे पाक महीना रमजान को माना गया है। रमजान में हर मुसलमान रोजा (उपवास) रख कर अल्लाह की इबादत रमजान में रोजे का महत्व इसलिए भी अधिक होता है क्योंकि इस महीने में की गई इबादत का फल कई गुना अधिक मिलता है। रमजान के आखिरी दिन ईद मनाई जाती है। लेकिन ईद से एक दिन पहले जुम्मे की नमाज अदा की जाती है, जिसे अलविदा जुम्मा भी कहा जाता है। इस्लाम में जुम्मे की नमाज का महत्व काफी अधिक बताया गया है। इस्लाम धर्म में जुम्मा यानी शुक्रवार के दिन को काफी खास माना गया है। रमजान में हर शुक्रवार की अहमियत अधिक होती है लेकिन आखिरी जुम्मा हर मुसलमान के लिए विशेष महत्व रखता है।